Saturday, June 18, 2011

किस, जगह जाएँ ...किस को दिखलायें ...जख्में दिल अपना ...


मेरी यादों के...  गुलदस्ते से एक सदाबहार महकता  फूल ...
..आज मैं खोज़ के लाया हूँ ,एक three-in- one
flavored ice cream cone , जिसे पा कर आप का मन...खुशी, गम् और
दर्द तीनों का एहसास करेगा |
ये आशा भोंसले जी की आवाज में है ,पर इसका वीडियो पाने में ,मैं
असमर्थ रहा | पर मेरा आप से वादा है कि इसे सुन कर आप को
कोई मायूसी नही होगी | सोने से पहले ,आँखे मूंद कर एक शांत
माहौल में सुनें | ये आप को आप के अतीत की यादों में ले जायेगा ,
और मेरा ...मानना है कि अतीत कि यादें हमेशा सुकूं देती है |
चाहे उन यादों में दर्द का समावेश ही, क्यों न हो|
पर एहसासों को महसूस करने कि जरूरत तो है ही... 
तो सुनिये ...फिर गिला-शिकवा बाद में सही ...

फिल्म : लाइट हाउस-१९५८
फिल्म : ठोकर - १९५३




(अगर आप को ...अच्छा लगे तो मैं इसका आडियो फाइल आप को ई-मेल 
कर सकता हूँ ) अशोक सलूजा 

26 comments:

  1. सच में सुकून देने वाला गीत है.... मन का दर्द कहाँ कोई समझ पाता है.....?

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  2. बहुत आभर सुनवाने का.

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  3. दिल को छू लेने वाला गीत। धन्यवाद।

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  4. मुझे जरूर मेल कर दें इसका आडिओ फाईल । धन्यवाद।

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  5. मन को सूकून पहुचाने वाला गीत, सुनवाने के लिए धन्यवाद

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  6. आडियो फाईल के मेल की प्रतिक्षा है. धन्यवाद सहित...

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  7. शुक्रिया भाई साहब दर्द से साक्षात्कार करवाने के लिए .अपना सा लगा .

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  8. सचमुच मेहनत से की गई खोज है ।
    यह गाना पहले कभी नहीं सुना अशोक जी ।
    आभार इस के लिए ।

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  9. पहली बार सुना। बहुत पसंद आया ये गीत...

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  10. @ मोनिका जी,
    @ समीर भाई जी
    @ प्रवीण जी,
    आप सब को मेरा परोसा गीत अच्छा लगा ,ये जान कर मुझे भी
    अच्छा लगा |
    आप का आभार !

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  11. @ निर्मला जी , आप के कहे अनुसार ऑडियो भेज दिया है|

    @ दीपक जी, आप की पसंद के लिये, शुक्रिया!

    @ बाकलीवाल जी, आप का ई -मेल नही है ,आप सुझाये कैसे ...

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  12. @ श्रीवास्तवा जी,
    @ डॉ.दराल जी ,
    @ डॉ.दिव्या जी ,
    आप सब को गीत पसंद आया ,मेरी पसंद आप को पसंद आई |
    आप सब का आभार |

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  13. वीरू भाई , आप को गीत अपना सा लगा,मुझे आप अपने से लगे!
    शुक्रिया!

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  14. इस गीत में अपने आपको तलाशना अच्छा लगा
    आभार

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  15. @ रचना जी ,
    @ शेखर सुमन जी,
    @ दिगम्बर नासवा जी,

    मेरी पसंद का गीत सुनने के लिये
    आप सबका आभार !

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  16. बहुत ही प्यारा,मधुर गीत

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  17. दादा आभार आपका !आप भी दर्दीले गीतों का सिलसिला ज़ारी रखिये -जो मैं जानती बिछड़त हैं सैंया घुंघटा में आग लगा देती .सोनिया जी के खिलाफ मोर्चा खुला मिलेगा .

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  18. आप यूं ही अगर हमसे मिलते रहे देखी एक दिन प्यार हो जायेगा .

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  19. अब क्या मिसाल दूं मैं तुम्हारे शबाब की ,इंसान बन गई है किरण माहताब की .शुक्रिया .

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  20. बहुत ही सुंदर गीत पेश किया आपने,सही लिखा है तीनो एहसास है गीत में!!

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  21. दर्द का अहसास कराते रहिये यार चाचू ,यूँ ही गीत सुनते रहिये और सुनाते रहिये.आखिर दर्द ही तो दवा है दर्द की.

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मैं आपके दिए स्नेह का शुक्रगुज़ार हूँ !
आप सब खुश और स्वस्थ रहें ........

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