Monday, March 19, 2012

अपनी तो आदत है .....कि हम कुछ नही कहते !!!


मैं समझा, वो सब अपने थे,
नींद से जागा,सब सपने थे॥
----अकेला 





31 comments:

  1. सुंदर संवेदनशील पंक्तियाँ

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  2. बिना कुछ कहे ही सब कुछ जता जाते हैं वो कभी कभी............

    बहुत सुन्दर गज़ल...
    शुक्रिया सर.

    सादर.

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  3. बेहद सुन्दर अभिव्यक्ति!
    सादर!

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  4. एतबार पे तो एतबार रखिये ,खुद से तकरार आँखें चार रखिये ,बस

    आईनों पे एतबार रखिये .

    कुछ कहने पे तूफ़ान उठा लेती है दुनिया ,......

    अपनी तो ये आदत है ,कि हम कुछ नहीं कहते ,

    उनको ये शिकायत है कि ,हम कुछ नहीं कहते . बढ़िया अभिव्यंजना .

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  5. वाह अकेला जी , आप तो पूरे शायर निकले .
    बहुत बढ़िया ग़ज़ल लिखी है बड़े भाई .
    आनंद आ गया .

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    1. डॉ.साहब ,
      आप के स्नेह का शुक्रगुजार हूँ मैं !
      शुभकामनाएँ!

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  6. वाह! खुबसूरत प्रस्तुति सर....
    सादर

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  7. आज आपके ब्लॉग पर बहुत दिनों बाद आना हुआ. अल्प कालीन व्यस्तता के चलते मैं चाह कर भी आपकी रचनाएँ नहीं पढ़ पाया. व्यस्तता अभी बनी हुई है लेकिन मात्रा कम हो गयी है...:-)

    इस उत्कृष्ट रचना के लिए ... बधाई स्वीकारें.

    नीरज

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  8. बेहतरीन अभिवयक्ति....

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  9. एक अकेलापन है मेरे चारों तरफ
    फिर भी जाने क्यूँ कुछ कह रहा हूँ मैं !

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    1. ऐसा ही कुछ कहके अपने अकेलेपन ,
      अपने से दूर भगा रहा हूँ मैं .....!
      आभार!

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  10. बेहद खूबसूरत गज़ल ...

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  11. तेरा यूँ वादा लेकर
    मुझ से जुदा होना ,
    एक हसीन धोखे को
    हकीकत का निशा समझी थी मैं |........अनु

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    Replies
    1. वाह...!
      यादेँ... हकीकत, का ही आइना,
      दिखाती हैं !!!
      शुभकामनाएँ!

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  12. मेरे बंद होठों की जुबाँ आप के दिल ने सुनी ....
    आप सब का बहुत आभार !
    खुश रहें !
    शुभकामनाएँ!

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  13. खामोशी भी कितने गीले शुक्वे कर जाती है ...
    बहुत ही लाजवाब शेर हैं यादों के झरोखे में लेजाते हुवे ....

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  14. कान हैं सबके बंद , होंठ मेरे सिले हुए ...

    सच कहा आपने ...

    वाह वाह !
    बहुत खूबसूरत ग़ज़ल है
    मुबारकबाद !

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  15. बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....


    इंडिया दर्पण
    की ओर से नव संवत्सर व नवरात्रि की शुभकामनाए।

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  16. मैं समझा, वो सब अपने थे,
    नींद से जागा,सब सपने थे॥
    हर अश आर अपनी अलग शख्शियत लिए हुए .
    हर अश आर अपनी अलग शख्शियत लिए हुए .

    मुद्दत हुई है यार को हमसे मिले हुए .

    बढ़िया ग़ज़ल कहता है यार ,सुबह हो या शाम . .

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  17. लाजवाब ग़ज़ल ... एक एक शेर कमाल का है ...

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  18. आपने याद दिलाया तो मुझे याद आया ....

    नुश्खे लिखने बाकी हैं ...

    आभार आपके आने का ,

    प्यार जताने का ,

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  19. सुंदर भावों से ओत-प्रोत बहुत सुंदर रचना।

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  20. दिल पे दस्तक करती पंक्तियों के साथ-साथ इश्क की सच्चाई भी इनमे निहित है!!

    आपकी नेहा बेटा:)

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मैं आपके दिए स्नेह का शुक्रगुज़ार हूँ !
आप सब खुश और स्वस्थ रहें ........

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