Friday, September 21, 2012

ये सब वक्‍त की बाते है.....


गिला किससे करूँ ,फरियाद भी कोई सुनता नही 
हूँ वक्त का, मुरझाया फूल ,जिसे कोई चुनता नही |
--अकेला 
  
ये  वक्‍त भी क्या-क्या रंग दिखाता है 
सपने दिखला मन को बहलाता है 
क्यों ये आज गीत पुराना 
बार-बार मेरे लबो पर आता है

"आज ऊँगली थाम ले मेरी  
तुझे मैं चलना सिखलाऊँ
कल हाथ पकड़ना मेरा 
जब मैं बुढा हो जाऊं "

क्या देख लिया तुने जग में 
जो ये गीत तुझे न भाता है 
कहाँ छूट गए वो रिश्ते-नाते 
था जिनसे पुराना नाता है 

कहाँ गए वो भाई-बंधू 
अब पास कोई न आता है 
जिसने दिखाए ये सपने सारे 
वो समय अब दूर खड़ा मुस्काता है 

ये सब वक्‍त की बाते है 
चंद सांसों की मुलाकाते हैं 
कुछ दिन अच्छे,कुछ अच्छी रातें हैं 
बाकि तो सब झूठी बातें हैं

अब कुछ भी मेरे पास नहीं 
न कोई मन को भाता है 
आए 'अकेला' जाये 'अकेला' 
बाकि सब यहीं रह जाता है ......  

अशोक'अकेला\

34 comments:

  1. समय के साथ बदलते रिश्ते नाते ....

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  2. आए 'अकेला' जाये 'अकेला'
    बाकि सब यहीं रह जाता है ......
    gahan abhivyakti ...!!
    shubhkamnayen ...!!

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  3. तुझे सूरज कहूं या चंदा
    तुझे दीप कहूँ या तारा......!
    बहुत सुन्दर सलूजा साहब ! बस यही कहूंगा की हर चीज वक्त की मारी है !
    सब वक्त-वक्त की बात है !

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    Replies
    1. तुझे सूरज कहूं या चंदा
      तुझे दीप कहूँ या तारा......!
      जो चाहे मर्ज़ी कह लो
      पर हूँ वक्त का मारा ......!
      आभार भाई जी !

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  4. यात्रा का बहुत हिस्सा तो अकेले ही बिताना होता है।

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  5. गिला किससे करूँ ,फरियाद भी कोई सुनता नही
    हूँ वक्त का, मुरझाया फूल ,जिसे कोई चुनता नही |
    --अकेला
    क्षमा बड़ेंन को चाहिए ,वीरू को उत्पात ...शुक्रिया .जीवन तो जी लिया अब तो रिहर्सल है गिला कैसा .बहुत दिया देने वाले ने तुझको ...

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    Replies
    1. क्षमा बड़ेंन को चाहिए ,वीरू को उत्पात
      ख़ुद अमरीका जा बसे हमे लगा के घात|

      रिहर्सल भी ....और वो भी अमरीका में
      वापस तो इधर ही आना है न ....:-)))

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  6. बहुत सुन्दर,समय के साथ बहुत कुछ बदल जाता है और हम सिर्फ देखते रह जाते हैं..

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  7. बहुत सुंदर रचना


    कहाँ गए वो भाई-बंधू
    अब पास कोई न आता है
    जिसने दिखाए ये सपने सारे
    वो समय अब दूर खड़ा मुस्काता है


    सुंदर

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    Replies
    1. सब वक्त की बात है ....कहीं न कहीं
      सब के साथ है !
      आभार !

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  8. वक्त के साथ बदलते रिश्ते

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  9. "आज ऊँगली थाम ले मेरी
    तुझे मैं चलना सिखलाऊँ
    कल हाथ पकड़ना मेरा
    जब मैं बुढा हो जाऊं "

    क्या देख लिया तुने जग में
    जो ये गीत तुझे न भाता है
    कहाँ छूट गए वो रिश्ते-नाते
    था जिनसे पुराना नाता है .....आँखें भर आईं

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    Replies
    1. स्नेह के लिये आभार !
      स्वस्थ रहें!

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  10. मन को छूते शब्‍द ... भावमय करती अभिव्‍यक्ति ।

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  11. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (22-09-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  12. मन को छू गए हर लफ्ज़....
    आँखें नम हो गयी...
    सादर
    अनु

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    Replies
    1. खुश रहें,स्वस्थ रहें
      स्नेह के लिये आभार !

      Delete
  13. समय के साथ सब बदल जाता है..
    अकेले आये थे और अकेले ही जाना होता है..
    भावमय करती रचना...

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  14. बहुत सुंदर !
    अकेला होना या फिर होना किसी के साथ
    क्या ये नहीं है सिर्फ एक सोचने की बात?

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  15. सुशील जी ....इस सोच पर ही तो निर्भर हैं हम ..
    आभार आपका !

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  16. अकेलेपन की त्रासदी को कहती बहुत मर्मस्पर्शी रचना ।

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    Replies
    1. क्या कहूँ ....!!!

      आभार आपके आने का !

      Delete
  17. "आज ऊँगली थाम ले मेरी
    तुझे मैं चलना सिखलाऊँ
    कल हाथ पकड़ना मेरा
    जब मैं बुढा हो जाऊं "
    अति सुंदर | वाह |
    मेरी नई पोस्ट:-
    मेरा काव्य-पिटारा:पढ़ना था मुझे

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  18. अब कुछ भी मेरे पास नहीं
    न कोई मन को भाता है
    आए 'अकेला' जाये 'अकेला'
    बाकि सब यहीं रह जाता है ......

    यही शाश्वत सत्य है. बहुत सुंदर प्रस्तुति.

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  19. वक्त ही तो है जो गुजरता जाता है पर बीतता कुछ भी नहीं है सब साथ ही रहता है साथ ही चला जाता है | नातों की मिठास लिए अच्छी पोस्ट आभार |

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  20. कहाँ गए वो भाई-बंधू
    अब पास कोई न आता है
    जिसने दिखाए ये सपने सारे
    वो समय अब दूर खड़ा मुस्काता है ...

    पता नहीं क्यों पर ये नियति बन गई है आज ... अपने साथ छोड़ते जाते हैं ... अपने में मसरूफ होते जा रहे हैं सब ...
    पर अकेले आना जाना जीवन का सत्य ही तो है ...

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  21. सुंदर !!
    "आज ऊँगली थाम ले मेरी
    तुझे मैं चलना सिखलाऊँ
    कल हाथ पकड़ना मेरा
    जब मैं बुढा हो जाऊं "
    :-)

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  22. सुन्दर प्रस्तुति।

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  23. अब कुछ भी मेरे पास नहीं
    न कोई मन को भाता है
    आए 'अकेला' जाये 'अकेला'
    बाकि सब यहीं रह जाता है ......

    my post KYUN????

    http://udaari.blogspot.in

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  24. अब कुछ भी मेरे पास नहीं
    न कोई मन को भाता है
    आए 'अकेला' जाये 'अकेला'
    बाकि सब यहीं रह जाता है ......

    my post KYUN????

    http://udaari.blogspot.in

    ReplyDelete
  25. आप सब के प्यार, स्नेह.मान-सम्मान प्रदान करने के लिये
    मैं अपने दिल से आप सब का आभार प्रकट करता हूँ ....
    आप सब खुश और स्वस्थ रहें !
    शुभकामनायें!

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मैं आपके दिए स्नेह का शुक्रगुज़ार हूँ !
आप सब खुश और स्वस्थ रहें ........

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