Sunday, December 23, 2012

अच्छा-बुरा जैसा भी है... मेरा ही दिल है !!!


अक्सर पूछते हैं वो दूसरों से 
कि क्यों... मैं उदास रहता हूँ 
क्यों... रहते हैं गुप-चुप से वो 
जब भी कभी, मैं उनके पास रहता हूँ ....
--अकेला

अच्छा-बुरा जैसा भी है... मेरा ही दिल है !!!

 मेरे दिल ने, मुझ को क्या दिया
 भावुक बना... तन्हा छोड़ दिया

 जिस दिल ने किया, बर्बाद मुझे
 लो आज मैंने भी, उसे तोड़ दिया

 न छोड़ा मुझे, कहीं का भी इसने
 लो मैंने.. आज इसको छोड़ दिया

 ये मेरा होकर भी, मेरा न हुआ कभी
 जहाँ चाह इसने,अपना नाता जोड़ लिया

 टूटा-फूटा जब रहा न, किसी काम का
 फिर रुख अपना,मेरी तरफ मोड़ लिया

 अच्छा-बुरा जैसा भी है, मेरा ही दिल है
 आखिर फिर, मैंने इसे अपनी गोद लिया

 न जाऊंगा अब, कभी तुझको छोड़ 'अकेला'
 अब सबसे मैंने, अपना नाता तोड़ लिया..!!!
अशोक'अकेला'

33 comments:

  1. आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 26/12/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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  2. आपकी कविता की सुंदर पंक्ति ये मेरा होकर भी मेरा न हुआ कभी गुलजार साहब की इश्किया फिल्म की पंक्ति की याद दिलाती है किसको पता था पहलू में रखा दिल इतना पाजी होगा, हम तो सोचे थे हम जैसा ही हाजी होगा लेकिन ऊपर की चार लाइनें मुझे सबसे अच्छी लगी, दोनों की सतह में प्रगट हो रही खामोशियाँ अंदर की कितनी सारी हलचलों का एहसास दे रही हैं।

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    1. दिल के लिए हलचल का होना जरूरी है .....
      शुक्रिया!

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  3. कोमल भाव लिए हृदयस्पर्शी रचना...
    लाजवाब...
    बेहतरीन....
    :-)

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    1. रीना जी ...
      खुश रहें!

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  4. वाह ! ये दिल ये पागल , दिल मेरा --
    अति सुन्दर .

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    1. आखिर दिल ही तो है .....

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  5. आशिकी में हर आशिक हो जाता है मजबूर ,इसमें दिल का क्या कसूर।
    इतने मायूस ना हों जनाब , दिल की कैफ़ियात तो बदलती ही रहती है। कभी इसे दूसरों की ख़ुशी में भी बड़ी ख़ुशी मिल जाती है।

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    1. आमिर, शायद आपका कहना ही सही हो ......

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  6. टूटा-फूटा जब रहा न, किसी काम का
    फिर रुख अपना,मेरी तरफ मोड़ लिया ..

    बहुत खूब ... ये दिल ये पागल दिल मेरा .. क्यों बुझ गया ...
    दिल तो है दिल ... दिल का ऐतबार क्या कीजे ...

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    1. अच्छा-बुरा जैसा भी है... मेरा ही दिल है !!!

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  7. हाँ जी! ये दिल ही तो है

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    1. जी अंजू जी ...
      आखिर ये दिल ही तो है ....

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  8. ये मेरा होकर भी, मेरा न हुआ कभी
    जहाँ चाह इसने,अपना नाता जोड़ लिया

    ...वाह!यह दिल भी क्या क्या चीज है...

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  9. आपके यहाँ जब भी आता हूँ कभी निराशा हाथ नहीं लगती है हमेशा कुछ ना कुछ बेहतरीन पढ़ने को मिलता है।

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    1. जाट भाई ... खुश रहें !

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  10. न जाऊंगा अब, कभी तुझको छोड़ 'अकेला'
    अब सबसे मैंने, अपना नाता तोड़ लिया..

    बहुत शानदार प्रस्तुति,,,अशोक जी,बधाई

    recent post : समाधान समस्याओं का,


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  11. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार (24-12-2012) के चर्चा मंच-११०३ (अगले बलात्कार की प्रतीक्षा) पर भी होगी!
    सूचनार्थ...!

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  12. अजी जब नाता टूट जाएगा ,चर्चा भी न होगा ,सरे आम उसका .शुक्रिया आपकी टिपण्णी का .हमारी धरोहर है आपकी ताज़ा टिपण्णी .

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  13. ये मेरा होकर भी, मेरा न हुआ कभी
    जहाँ चाह इसने,अपना नाता जोड़ लिया

    टूटा-फूटा जब रहा न, किसी काम का
    फिर रुख अपना,मेरी तरफ मोड़ लिया
    बिल्‍कुल सच ... बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति

    सादर

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  14. जैसा भी है, धड़कता तो आपके लिये ही है।

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  15. ये दिल...न जाने धड़कता क्यूँ है
    कोई पास हो या कि ना पास हो ...ये दिल..

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  16. शानदार ग़ज़ल....नाता टूट गया फिर जय शिकवा हो किसी को...

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  17. मेरे दिल ने, मुझ को क्या दिया
    भावुक बना... तन्हा छोड़ दिया

    ये मेरा होकर भी, मेरा न हुआ कभी
    जहाँ चाहा इसने,अपना नाता जोड़ लिया

    बात तो गलत ही है ...

    जिस दिल ने किया, बर्बाद मुझे
    लो आज मैंने भी, उसे तोड़ दिया

    न छोड़ा मुझे, कहीं का भी इसने
    लो मैंने.. आज इसको छोड़ दिया

    जैसे को तैसा
    ले... अब आया न मज़ा ?
    :)
    वाऽह ! क्या बात है !
    आदरणीय चाचू अशोक'अकेला' जी
    मस्त लिखा है ...
    भावों का दरिया बहने दें ... ऐसे ही ...
    मस्त रहें मस्ती में ~ आग लगे बस्ती में

    नव वर्ष अब समीप ही है ...
    अग्रिम शुभकामनाओं सहित…
    राजेन्द्र स्वर्णकार

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  18. बाऊ जी
    नमस्ते

    दिल की बातें दिल ही जाने , और न जाने कोई

    अपना आशीष दीजिये मेरी नयी पोस्ट

    मिली नई राह !!

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  19. दिल ने भले ही आपको तन्हा बनाया हो पर आपने दिल को तन्हा नहीं रहने दिया ... खूबसूरत प्रस्तुति

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  20. @झा साहब जी, भदोरिया जी ,शास्त्री जी , वीरू भाई जी ,सदा जी ,पाण्डेय जी ...
    आप सब के स्नेह के लिए दिल से आभार !
    @अर्चना जी,गाफ़िल जी, राजेन्द्र जी,सुमन जी,
    बहुत-बहुत आभार आपका |
    @ उड़ता पंछी ...आप की उड़ान सदा ऊँची रहे |
    @संगीता जी , आप के स्नेह का आभार |

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मैं आपके दिए स्नेह का शुक्रगुज़ार हूँ !
आप सब खुश और स्वस्थ रहें ........

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