Monday, April 01, 2013

ख्वाबो ...हकीक़त की दुनियां ...!!!


तुम ख्वाबों में बहते हो
मैं हकीक़त में रहता हूँ ,
तुम आसमां पे उड़ते हो 
मैं जमीं पे रहता हूँ ||
---अकेला
ख्वाबो ...हकीक़त की दुनियां ...!!!


इक ख्वाबो की दुनियां
 इक हकीक़त की दुनियां
 इक आसमां पे उड़ाती है
 इक जमीं से उठाती है

 इक खुशियाँ बरसाती है
 इक आग सी लगाती है
 इक सपने दिखाती है
इक  सपने दफनाती है

 इक महल बनाती है
 इक झोंपड़ा गिराती है
 इक उम्मीद जगाती है
 इक ना-उम्मीद कराती है

 इक चाँद-तारे सजाती है
 इक रातों को रुलाती है
 इक बस्ती बसाती है
 इक हस्ती मिटाती है

 लो सपने ने मारा झटका
 मुझे जमीं पे ला के पटका
 वो इक सपना था
            यह इक हकीक़त है ...... 


अशोक'अकेला'

26 comments:

  1. आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 03/04/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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  2. वाह बहुत लाजवाब और सशक्त रचना, शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  3. बहुत खून सलूजा साहब !
    और मेरी दुनिया है सिमटी सिर्फ दो लहमा में
    कभी एक लहमा हसाता है, कभी एक रुलाता है
    और इन्ही दो लह्मों के बीच हम जीने की कोशिश करते रहे है !

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  4. दिलचस्प। क्या ही खूब फर्क किया है सपने और हकीकत की दुनिया का।

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  5. बहुत सुंदर रचना
    क्या कहने

    लो सपने ने मारा झटका
    मुझे जमीं पे ला के पटका
    वो इक सपना था
    यह इक हकीक़त है ......

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  6. सपनों के संसार से जुड़े सुख भी दुःख भी.....

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  7. अच्छी संवेदनशील कविता बधाई

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  8. बेहद खूबसूरत है ये हकीकत का जहान....
    जहाँ ख्याब अधूरे और हकीकत का कठोर धरातल है

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  9. बहुत सुंदर.एक खूबसूरत हकीकत

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  10. सपनों की दुनिया का नशा अजीब सा होता है हम सचमुच उड़ते रहते हैं लेकिन जब नशा काफूर होता है तो कठोर यथार्थ से सामना होता है। इन दो विरोधी बिन्दुओं पर नट की तरह संतुलन बनाती चलती जिंदगी पर सुंदर कविता रच दी आपने

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  11. बहुत खूबसूरत रचना सर!
    ख्वाब और हक़ीक़त का इतना सा फसाना है...
    आँख से मोती चुन... फूलों पे सजाना है....
    ~सादर!!!

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  12. जाने कितने ख्वाब हमारे बादल बन कर तैर रहे हैं,
    जिधर चल रही हवा जगत की, दौड़ रहे हैं, फैल रहे हैं।

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  13. सपने हैं सपने, कब हुए अपने...

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  14. वह न सपना था न हक़ीक़त थी, वह तो केवल सपनों में बसी ज़िंदगी की असलियत थी।

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  15. बहुत सुंदर रचना , लाजवाब

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  16. तुम ख्वाबों में बहते हो
    मैं हकीक़त में रहता हूँ ,
    तुम आसमां पे उड़ते हो
    मैं जमीं पे रहता हूँ ..

    बहुत खूब ... ओर ऐसे ही मिलन हो नहीं पाता ... जीवन यूं ही चलता रहता है समानांतर उनके साथ ...

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  17. दो पहलू जीवन के ,दो ठहराव जीवन की .सुन्दर रचना .

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  18. सपना और हकीकत का बहुत बढ़िया चित्रण ...

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  19. apki kawita to jandar ban pada hai....abhar

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  20. खूबसूरत सपना .....:))

    अब तो काफी नज्में हो गईं एक किताब हो जानी चाहिए ......

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  21. इक ख्वाबो की दुनियां
    इक हकीक़त की दुनियां
    इक आसमां पे उड़ाती है
    इक जमीं से उठाती है

    ख़्वाबों से हकीकत का सफर जीवन के विभिन्न आयामों में संतुलन एक खूबसूरत कविता में अतुलनीय है.

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  22. सपने तो बस सपने ही हैं ... हकीकत कुछ और ही होती है

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मैं आपके दिए स्नेह का शुक्रगुज़ार हूँ !
आप सब खुश और स्वस्थ रहें ........

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