Saturday, January 14, 2012

हसीन ख्वाब में, एक हसीं मुलाक़ात....


"टूटा हुआ फूल खुश्बू दे जाता है 
बीता हुआ पल यादें दे जाता है 
हर किसी का अंदाज़ होता है अपना 
कोई ज़ख्मो पे प्यार तो कोई प्यार 
में जख्म दे जाता है "|


यादों के पिटारे से ....लाया हूँ .मैं आप के लिए
एक हल्की-फुलकी ,दिल को सहलाती ,सुकून
देती,अपने प्यार को पुकारती....
एक दिलकश रोमांटिक ,छोटी सी गजल ,
प्यार में डूबी ,मदहोश करती दिल को
लुभाती ,रफी साहब की गुनगुनाई मीठी
आवाज़ में ...
वर्ष : १९५६
फिल्म : राज हठ
गायक: रफ़ी साहब
संगीत : शंकर-जयकिशन
गीतकार : हसरत जयपुरी
कलाकार : प्रदीप कुमार .मधुबाला

आए बहार बन के लुभा कर चले गए
क्या राज़ था जो दिल में छुपा कर चले गए


कहने को वो हसीन थे आँखें थीं बेवफा
दामन मेरी नज़र से बचा कर चले गए


इतना मुझे बता दो मेर दिल की धड़कनों
वो कौन थे जो ख़्वाब दिखा कर चले गए


आए बहार बन के लुभा कर चले गए
क्या राज़ था जो दिल में छुपा कर चले गए ||









12 comments:

  1. रफी साहब की मधुर आवाज में इस हसीन-तरीन गीत को देख/सुनकर रविवार की सुबह खुशगवार हो गई,वाह मजा आ गया.

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  2. कुछ यादे हमेशा याद रहती है।

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  3. बहुत सुन्दर ग़ज़ल गाई है रफ़ी साहब ने ।

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  4. बहूत अच्छी गजल है , रफी साहब जी कि आवाज ने तो मन मोह लिया
    धन्यवाद आपका ...

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  5. हर किसी का अंदाज़ होता है अपना
    कोई ज़ख्मो पे प्यार तो कोई प्यार
    में जख्म दे जाता है "|सौ प्रतिशत सही ...

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  6. बहुत सुंदर रचना प्रभावशाली प्रस्तुति

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  7. इतना मुझे बता दो 'मेरे ' दिल की धडकनों में ,
    वो कौन थे जो ख़्वाब दिखाकर चले गए .सुन्दर प्रस्तुति .

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  8. बढिया ...आभार रफ़ी साब का ये गाना शेयर करने के लिए

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  9. कोई ज़ख्मो पे प्यार तो कोई प्यार
    में जख्म दे जाता है "|

    Wah !

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  10. यादों के कुंवे में कंकड डाल दिया आपने अशोक जी ....
    बहुत ही कमाल की पंक्तियाँ और लाजवाब गाल है रफ़ी साहब की आवाज़ में ...

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मैं आपके दिए स्नेह का शुक्रगुज़ार हूँ !
आप सब खुश और स्वस्थ रहें ........

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