Wednesday, November 30, 2011

मैं रास्ते में पड़ा पत्थर हूँ....

"मील का पत्थर"

मैं रास्ते में पड़ा पत्थर हूँ 
निगाहों में आपकी बद्त्तर हूँ 
न देख मुझको,तू नफ़रत से
देखता हूँ, सब को,  इस हसरत से
  
न मार मुझको ठोकर तू   
हो न जाये कहीं चोटल तू  
प्यार से मुझको उठा  तू 
किनारे पे रख,के जा तू 

खुद को ठोकर से बचा तू  
दूसरों के लिये रास्ता बना तू

खुद भी बच,और मुझको बचा तू 
दिल का सुकून भी पायेगा तू 
जो गै़र  की ठोकर से 
मुझ को बचायेगा  तू 

फिर मैं भी "मील का
 पत्थर" बन जाऊंगा 
सब के लिये निशानी 
बन के काम आऊंगा

किसी भटके मुसाफिर को 
मंजिल का पता बताऊंगा ||


अशोक'अकेला'







42 comments:

  1. आपकी यादों के इस रचना संसार में कई मील के पत्थर हैं!
    सुन्दर कविता!

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  2. दुनिया वाले मन से जानते है कि इस मील के पत्थर के बिना हम जैसे घुमक्कड कितने परेशान हो जाते है।

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  3. जो गै़र की ठोकर से
    मुझ को बचायेगा तू

    फिर मैं भी "मील का
    पत्थर" बन जाऊंगा
    सब के लिये निशानी
    बन के काम आऊंगा

    किसी भटके मुसाफिर को
    मंजिल का पता बताऊंगा ||

    yahi to samajhna hai....

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  4. न मार मुझको ठोकर तू
    हो न जाये कहीं चोटल तू
    प्यार से मुझको उठा तू
    किनारे पे रख,के जा तू

    सुंदर सन्देश ..... स्वयं भी बचो और औरों को भी बचाओ ...

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  5. आपके मन से निकली कविता ने मुझे बहुत भाव विभोर कर दिया. क्षमा याचना सहित अपने मन के भावों को सादर समर्पित कर रहा हूँ :-
    वो हीरा लाल-जवाहर है
    खुद को कहता वो पत्थर है
    सब देख रहे हैं हसरत से
    उसको पाने की चाहत से.
    अंधा ही ठोकर मारेगा
    और खुद चोटिल हो जाएगा
    जो दिल से इसे लगाएगा
    दिल का अमीर हो जाएगा.
    खुद अपना जीवन सफल करे
    सबकी बाधाएं विफल करे.
    क्रमश:....

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  6. चल आगे बढ़ और गले लगा
    दिल का सकून तू पाएगा
    जब तक यह पत्थर पास तेरे
    तू खुद भी पूजा जाएगा.

    एक पत्थर लाल-जवाहर है
    एक पत्थर मील का पत्थर है
    पर हमने जिसको पूजा है
    वह मन-मंदिर का ईशवर है.

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  7. राह की लम्बाई कितनी, और यह समझाऊँगा।

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  8. न देख मुझे को,तू नफ़रत से
    देखता हूँ, सब को, इस हसरत से .अच्छी रचना मनोहर पथप्रदर्शक रचना .अशोक भाई कृपया पहली पंक्ति में "मुझे को ",कृपया मुझको करलें .धन्यवाद सिफारिश मानने के लिए .

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  9. वाह वाह , कवि अशोक जी ।
    कविता के माध्यम से सुन्दर विचार व्यक्त किये हैं ।

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  10. सचमुच मील का पत्थर....
    सुन्दर रचना सर...
    सादर बधाई...

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  11. खुद को ठोकर से बचा तू
    दूसरों के लिये रास्ता बना तू
    खुद भी बच,और मुझको बचा तू
    दिल का सुकून भी पायेगा तू
    जो गै़र की ठोकर से
    मुझ को बचायेगा तू ...
    सटीक एवं सार्थक पंक्तियाँ! सुन्दर सन्देश देती हुई शानदार रचना लिखा है आपने!

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  12. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा मंच-715:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

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  13. मैं रास्ते में पड़ा पत्थर हूँ
    निगाहों में आपकी बद्त्तर हूँ
    न देख मुझको,तू नफ़रत से
    देखता हूँ, सब को, इस हसरत से....बेहतरीन रचना प्रस्तुती.....

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  14. बहुत सुंदर प्रस्तुति । मेरे नए पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

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  15. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति .ब्लॉग दर्शन के लिए शुक्रिया अशोक भाई .सलामत रहो .सेहतमंद रहो .

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  16. वाह ...बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

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  17. Truelly awesome... ek fool ki abhilasha to sabne padhi hogi.. aapne patthar ko bhi zubaan de di.. uski abhilasha ko murta rup de k.. :)

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  18. your poems are truly a masterpiece....

    nice

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  19. wow !...Lovely creation !...Regards,

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  20. फिर मैं भी "मील का
    पत्थर" बन जाऊंगा
    सब के लिये निशानी
    बन के काम आऊंगा

    किसी भटके मुसाफिर को
    मंजिल का पता बताऊंगा ||

    बहुत सुन्दर भाव

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  21. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा शनिवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!चर्चा मंच में शामिल होकर चर्चा को समृद्ध बनाएं....

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  22. फिर मैं भी "मील का
    पत्थर" बन जाऊंगा
    सब के लिये निशानी
    बन के काम आऊंगा

    किसी भटके मुसाफिर को
    मंजिल का पता बताऊंगा ||
    ...sach sabka apna-apna koi n koi mahtva jarur hai, aur prakriti ki to baat ni nirali hai.. kitna kuch samjhati/batati hai hamen..
    ..meel ke pathar ko lekar sarthak rachna padhna bahut achhla laga...

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  23. aapki rachna sach me meel ka pathar hai......

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  24. sir ek vinamra prarthana hai, ek baar hamari blog pe tashreef lana!

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  25. एक पत्थर का आत्म मंथन ...आपके शब्दों में पढ़ कर अच्छा लगा ....सार्थक कविता ....

    मेरे ब्लॉग पर आने का और एक सही टिपण्णी देने का धन्यवाद जी

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  26. वाह...बेजोड़ भावाभिव्यक्ति...बधाई स्वीकारें

    नीरज

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  27. किसी भटके मुसाफिर को
    मंजिल का पता बताऊंगा |

    और अपना जीवन सार्थक कर जाऊँगा………शानदार प्रस्तुति।

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  28. फिर मैं भी "मील का
    पत्थर" बन जाऊंगा
    सब के लिये निशानी
    बन के काम आऊंगा

    ...बहुत खूब! सुंदर प्रस्तुति..

    ReplyDelete
  29. किसी भटके मुसाफिर को
    मंजिल का पता बताऊंगा'

    Very nice!

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  30. आपकी इस रचना की सुन्दरता उसके शीर्षक में ही अभिव्यक्त हो गयी थी,और जैसे ही इस रचना को पढ़ा यकीन हो गया!!!!!
    बहुत ही उत्कृष्ट रचना:)
    -आपकी नेहा बेटा:)

    ReplyDelete
  31. न मार मुझको ठोकर तू
    हो न जाये कहीं चोटल तू
    प्यार से मुझको उठा तू
    किनारे पे रख,के जा तू

    बहुत सुन्दर उदगार ..काश ये भावना हम सब में भर जाए ..
    तो आनन्द और आये
    भ्रमर ५
    बाल झरोखा सत्यम की दुनिया

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  32. मील का पत्थर तो हैं ही आप और आप जैसे लोग.
    जीवन मे प्रकाश स्तंभ बनकर आते हैं.कितना कुछ नही पा सकता है कोई आप लोगों के अनुभवों से.किसी को ठोकर लगे ऐसे पत्थर नही हैं आप.
    'खुद को ठोकर से बचा तू
    दूसरों के लिये रास्ता बना तू

    खुद भी बच,और मुझको बचा तू
    दिल का सुकून भी पायेगा तू
    जो गै़र की ठोकर से
    मुझ को बचायेगा तू ' ऐसी कामनाएं,आशाये दूसरों से ईश्वर का एक नेक बंदा ही कर सकता है. जानते हैं रास्ते पर पड़े पत्थर पर जब सिन्दूर लगा दिया जाता है तो वो भगवान के बराबर पूजनीय हो जाता है फिर कोई उसे पाँव तक लगाने की नही सोचता.आप जैसे लोगों पर तो जीवन के अनुभवों का सिन्दूर यूँ भी खूब होता है फिर कैसे कोई ठोकर लगाने की सोच भी सकता है.वीरे!लोग पराये या अपने इसे अनदेखा कर दे पर आप लोगों के ग्रेस की कद्र न कर पाना उनका अपना दुर्भाग्य है.जाने क्यों एक पीड़ा दिखती है मुझी आपकी इस कविता मे जो नई पीढ़ी द्वारा पुरानी पीढ़ी की उपेक्षा,अकेलेपन के दर्द को दर्शाती है.इस स्टेज से हर बंदे को गुजरना है वो यह सच भूल जाता है.भीतर तक हिला देती है आपकी यह कविता.

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  33. बोलीवुड का मील का पत्थर चला गया अंतिम संकार भी लन्दन में .नमन इस कार्यशील उद्यमी की अहिर्निश लगन को रचनात्मक अगन (आंच )को .

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  34. .


    आदरणीय चाचा बाबू अशोक जी
    सादर प्रणाम !


    रास्ते के पत्थर से कुछ भावनाप्रधान लोग ही रिश्ता मानते हैं
    मैं भी "मील का
    पत्थर" बन जाऊंगा
    सब के लिये निशानी
    बन के काम आऊंगा

    किसी भटके मुसाफिर को
    मंजिल का पता बताऊंगा



    …आप जैसे संवेदनशील इंसान सबकी पीड़ा में सहभागिता निभाते हैं …

    बधाई और मंगलकामनाओं सहित…
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  35. फिर मैं भी "मील का
    पत्थर" बन जाऊंगा
    सब के लिये निशानी
    बन के काम आऊंगा

    किसी भटके मुसाफिर को
    मंजिल का पता बताऊंगा ||

    बेजोड प्रस्तुति. आभार.

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  36. जो जीवन मील का पत्थर बन सके वो सार्थक है ...
    हर किसी के बस में नहीं होता ये ....

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मैं आपके दिए स्नेह का शुक्रगुज़ार हूँ !
आप सब खुश और स्वस्थ रहें ........

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