Wednesday, December 21, 2011

जब हम जवां थे .....तब रोमांस में भी रोमांच था..... !!!









यादें.....!!!
"यू उठा तेरी यादो का धूआँ
जैसे चिराग बुझा हो अभी अभी"


क्यों याद आता है ,वो गुज़रा ज़माना
 जो नामुमकिन है,लौट के वापस आना |

 वो ठंडी रातों की, हसीं मुलाकातें
 वो दबे पांव तेरा, छत पे आना |

 वो कंपकपाती सर्दी ,थरथराते होंट
 कनखियों से देख,हौले से मुस्कुराना  |

 वो हाथों से मेरे, तेरी ओढ़नी का खींचना
 तेरा झटके से मेरी, बाँहों में आ के समाना  |

 वो एकटक मेरा, तेरी आँखों में देखना
 तेरा शर्म से अपनी, उठी पलकें झुकाना |

 वो रौशनी का दिखना, सीड़ियों पे आहट
 सुन! आ जाता आवाज़ तेरी में हकलाना |

 वो हल्के में फिसलना, मेरी बाँहों से तेरा
 फिर फुर्ती से सीड़ियों में, भाग के जाना |

 वो तेरे जाने के बाद, लगे अधूरी मुलाकात 
 याद आ गई बातें, जो रह गई तुझे सुनाना |

 वो भूल गया सब, अब! जब रह गया "अकेला"
 वक्त ने ले ली करवट, अब न चले कोई बहाना ||

अशोक"अकेला"



28 comments:

  1. हमको अब तक आशिकी का वो ज़माना याद है...

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  2. वक्त करवट ले रहा है,
    आँख भी अपनी खुली है,
    कल भी उतनी मधुरिमा थी,
    आज बन स्मृति खिली है।

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  3. जीवन के खास दौर की यादें .... समय के साथ बहुत कुछ बदला है....

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  4. वाह वाह सलूजा ही ।
    ज़वानी की यादें तो कातिलाना होती ही हैं ।
    आपकी ग़ज़ल भी कम कातिल नहीं ।

    बहुत सुन्दर लिखा है । बधाई ।

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  5. बहुत ख़ूबसूरत याद , सलूजा साहब !

    पतंग अपनी मुहब्बत की बुलंदी पर कटी लेकिन,
    मेरे हाथों से राना प्यार की तानी नही जाती !

    उम्रभर के लिए जब हमसफ़र बनाया था तुझे मैंने,
    तो जीवन से मेरे फिर क्यूं यह वीरानी नहीं जाती !!

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  6. आज का प्यार .....सुबह से शाम तक

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  7. वाह!
    बहुत बढ़िया!
    --
    आपकी प्रवि्ष्टी की चर्चा कल बृहस्पतिवार 22-12-2011 के चर्चा मंच पर भी की या रही है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल उद्देश्य से दी जा रही है!

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  8. फागुन से सम्बंधित रचना ' वटवृक्ष' के लिए भेजें - कहानी, कविता , ग़ज़ल , संस्मरण ..... एक सप्ताह के अन्दर

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  9. एक यात्रा सी करा दी।

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  10. sundar bhavo ki behtarin abhivykti...
    jaise - jaise padhhati ja rahi hu ankho ke samne chitra sa ubharata ja raha hai..

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  11. क्या उम्दा रचना है सर....
    सादर.

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  12. बहुत ही उम्मदा भावपूर्ण रचना॥ इस खूबसूरत गजल के बहाने आपने बहुतों कि यादें ताज़ा करा डालीं.... आभार...समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है
    http://aapki-pasand.blogspot.com/2011/12/blog-post_19.html
    http://mhare-anubhav.blogspot.com/

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  13. दिन जो पखेरू होते, पिंजरे में मैं रख लेता
    पालता उनको जतन से, मोती के दाने देता
    पलकों में रहता छुपाए.....

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  14. bahut hee sahaj tareeke se prambhivyakti....rahi baat man bharne kee..abhi naa jaao chor ke ke dil abhi bhara nahi..yad aa gay..sadar badhayee aaur apne blog par amantran ke sath......

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  15. कितनी बार द्वार से लौटा छू कर बंद किवाड़ तुम्हारे ...........बहुत अच्छी रचना ...

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  16. आप सब के मान-सम्मान,स्नेह का बहुत-बहुत
    अभिनन्दन और आभार !
    आप सब स्वस्थ और खुश रहें !
    शुभकामनाएँ!

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  17. लगता है पहली टिपण्णी स्पैम में चली गई ...
    आपकी यादों का सफर बेमिसाल यादें जोड़ जाता है पटल पे ..

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  18. बहुत सुंदर सार्थक रचना ....बहुत खूब अशोक जी.

    नई पोस्ट--"काव्यान्जलि"--"बेटी और पेड़"--में click करे.

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  19. वो भूल गया सब,अब! जब रह गया"अकेला"
    वक्त ने ले ली करवट, अब न चले कोई बहाना

    आप 'अकेला' कहें खुद को
    पर अकेले कहाँ है.
    जिगर और दिल में समेटे
    अपने सारा ही जहाँ हैं.

    सुन्दर प्रस्तुति के लिए बहुत बहुत आभार
    यार चाचू.

    आनेवाले नववर्ष की हार्दिक बधाई.

    समय मिले तो फिर से आईयेगा मेरे ब्लॉग पर.
    आपके आशीर्वचनों से मैं धन्य हो जाता हूँ.

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  20. वाह!
    बहुत बढ़िया! Behtareen....


    www.poeticprakash.com

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  21. very good thoughts and expression

    न जाने कितनी रातें
    कितने दिन बचे हैं ?
    ना जाने कितने लोग
    कितनी मुलाकातें
    कितनी हंसी बची है ?
    ना जाने कितना रोना ,
    कितना हंसना
    कितना सहना बचा है ?
    कब बंद हो जायेंगी आँखें
    किस को पता है?
    ना जाने कितने मौसम
    बदलेंगे
    कितने फूल खिलेंगे ?
    कब उजड़ेगा बागीचा
    किस को पता है ?
    ना जाने कितनी सौगातें
    मिलेंगी ?
    बह्लायेंगी या रुलायेंगी
    किस को पता है ?
    जब तक जी रहा
    क्यों फ़िक्र करता निरंतर
    ना तो परवाह कर
    ना तूँ सोच इतना
    जब जो होना है हो
    जाएगा
    जो मिलना है मिल
    जाएगा
    तूँ तो हँस कर जी
    जीवन को
    जो भी मिले
    गले लग कर मिल
    उससे

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  22. गुज़ारा ज़माना याद है ..बहुत खूबसूरत यादें

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  23. रूमानी यादें ...
    बहुत खूब

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  24. बहुत ही खुबसूरत यादे जिन्हें शब्दों में पिरो दिया है... अपने.....

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  25. मधुरिम यादों का अनवरत सिलसिला ..बहुत ही सुन्दर भाव पूर्ण अभिव्यक्ति ....स्मृतियों की सुगंध ....

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मैं आपके दिए स्नेह का शुक्रगुज़ार हूँ !
आप सब खुश और स्वस्थ रहें ........

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