ख़ुशामद वो शै है,जो कहने में बुरी
और सुनने में अच्छी लगती है ||
...अज्ञात
एक कवि जो अपनी कल्पना के
सुंदर शब्दों से कविता बनाता है|
एक साधारण इंसान जो अपने गुज़रे
लम्हों को अपनी यादों से सज़ाता है|
आप अपने ज़ज्बों से लिखते हो
में अपने तजुर्बों पे लिखता हूँ|
आप ख्यालों में सपने बुनते हो
में यादों में उनको चुनता हूँ|
आप ठहाकों में बह जाते हो
में मुस्करा के रह जाता हूँ|
आपकी आँखें सपने चमकाती हैं
मेरी आँखें बस टिमटिमाती हैं |
आप में अभी कोमलता का एहसास है
मुझ में समय की कड़वाहट का वास है |
आपकी कलम से जिंदगी निकलती है
मेरे हाथों से जिंदगी फिसलती है|
ये तो जवानी और बुढापे का दौर है
न इसपे चलता किसी का ज़ोर है|
इसमें न किसी की जफ़ा है ,न वफा है
ये तो बस सिर्फ जिंदगी का फ़लसफ़ा है.....
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अशोक"अकेला" |
आप एक कवि और मैं एक साधारण इंसान || ख़ुशामद वो शै है,जो कहने में बुरी और सुनने में अच्छी लगती है || ...अज्ञात *एक कवि जो अपनी कल्पना
ReplyDeleteके * *सुंदर शब्दों से कविता बनाता है|* * * *एक साधारण इंसान जो अपने गुज़रे * *लम्हों को अपनी यादों से सज़ाता है| * * * *आप अपने ज़स्बों।।।।।
(ज़ज्बों ,ज़ज्बातों ....)से लिखते हो* *में अपने तजुर्बों पे लिखता हूँ|* * * *आप ख्यालों में सपने बुनते हो * *में यादों में उनको चुनता हूँ|* * * *आप ठहाकों
में बह जाते हो * *में मुस्करा के रह जाता हूँ|* * * *आपकी आँखें सपने चमकाती हैं * *मेरी आँखें बस टिमटिमाती हैं |* * * *आप में अभी कोमलता का
एहसास है * *मुझ में समय की कढवाहट।।।।।।।।।(कड़वाहट )..... का वास है |* * * *आपक... अधिक »
आपकी कलम से जिंदगी निकलती है
मेरे हाथों से जिंदगी फिसलती है|
दादा कविता इन एहसासात से जुदा कहाँ है ?बढ़िया कही है आपने .
खुशामद में बड़ी ताकत ,खुशामद से ही आमद है .
वीरू भाई आप की इशारा करी गलतियाँ ....
Deleteसुधार ली गई हैं !
आभार!
ज़िंदगी का फलसफा ही झलक रहा है ...!!
ReplyDeleteसार्थक सुंदर रचना ....!!
बिलकुल सही लिखा है ज़िंदगी का फलसफा ...
ReplyDeleteयही दर्शन जीवन को गतिमय बनाये रखता है।
ReplyDeleteयादों की स्याही में कलम डुबो कवि कविता लिखता है
ReplyDeleteतभी तो उस रचना में कई चेहरे मिलते हैं
कई जिंदगानियां
कई सूखे आंसुओं की लकीरें
....
साधारण इंसान जो सच लिखता है यादों की स्याही से
अच्छा कवि वही होता है
जीवन के अनुभव से निकले दिल के उदगार जब लेखनी बनता है वही अच्छा रचना कार होता है,,,,,आपकी हर रचनाये जीवन के अनुभव से सरोबोर होती है,,,,
ReplyDeleteMY RECENT POST: माँ,,,
हर इंसान में एक कवि मन छिपा रहता हैं ...कवि की सोच आम इंसान से ही शुरू होती हैं ...शब्द और विचार लेखनी बन जाते है ...
ReplyDeleteआप सब का बहुत-बहुत आभार.....
Deleteमान-सम्मान के लिए !
पढ़ कर तो ऐसा लगता है की जैसे आपने हम जैसों की होंसला अफजाई ,और अपने दर्द को इसमें सिमेट दिया है.एक तरफ हमारे जज्बात खयालात ,और दूसरी तरफ आपके जिन्दगी के तजर्बात.
ReplyDeleteशुक्रिया आमिर भाई !
Deleteखुश रहें!
ना ना कहते भी कविता कह गए . :)
ReplyDeleteसुन्दर उद्गार प्रकट किये हैं .
बहुत सुन्दर ..मन के अहसास ही एक कवि को जन्म देते है.
ReplyDeleteडॉ साहब और आपका आभार ....
Deleteस्वस्थ रहें!
वाह...
ReplyDeleteबहुत सुन्दर प्रस्तुति!
आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (14-10-2012) के चर्चा मंच पर भी की गई है!
सूचनार्थ!
आभार शास्त्री जी !
Deleteबहुत अच्छी रचना
ReplyDeleteक्या बात
आभार आपका ....
Deleteअनुपम भाव संयोजित किये हैं आपने ... इस अभिव्यक्ति में
ReplyDeleteसादर
आपको ये जानकार ख़ुशी होगी की एक सामूहिक ब्लॉग ''इंडियन ब्लोगर्स वर्ल्ड ''शुरू हो चुका है.जिसमे भारतीय ब्लोगर्स का परिचय करवाया जायेगा.और भारतीय ब्लोग्स की साप्ताहिक चर्चा भी होगी.और साथ ही सभी ब्लॉग सदस्यों के ब्लोग्स का अपडेट्स भी होगा.ये सामूहिक ब्लॉग ज्यादा से ज्यादा हिंदी ब्लोग्स का प्रमोशन करेगा.आप भी इसका हिस्सा बने.और आज ही ज्वाइन करें.जल्द ही इसका काम शुरू हो जायेगा.
ReplyDeleteलिंक ये है
http://indians-bloggers.blogspot.com/
आभार!
ReplyDeleteस्वस्थ रहें!
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ReplyDeleteइंडियन ब्लोगर्स वर्ल्ड
आप का आभार ...आमिर भाई जी !
Deleteशुभकामनाएँ!
आपकी कलम से जिंदगी निकलती है
ReplyDeleteमेरे हाथों से जिंदगी फिसलती है|
दिल छू गई ये पंक्तियाँ बहुत ही बढ़िया प्रस्तुति बहुत बहुत बधाई
बहुत-बहुत आभार राजेश जी ...
Deleteस्वस्थ रहें!
एक साधारण इंसान जो अपने गुज़रे
ReplyDeleteलम्हों को अपनी यादों से सज़ाता है...
बहुत कुछ अपने पे समेटे लाजवाब रचना ।
राजपूत जी !
Deleteआपका आभार !
Very nice
ReplyDeleteअन्जाने शुभचिंतक !
Deleteआपका आभार !
आपकी कलम से जिंदगी निकलती है
ReplyDeleteमेरे हाथों से जिंदगी फिसलती है।
आप सृजनधर्मी हैं और सृजन से जिंदगी संवरती है।
आपके स्नेह .....का आभार !
Deleteज़िन्दगी से मिले ..तजुर्बों के सुंदर अहसास !
ReplyDeleteसादर....
सदा खुश रहें.......
Deleteयही लंबा अनुभव है ...
ReplyDeleteआभार भाई जी !
भाई जी ....
Deleteआपका स्नेह-भरा आगमन अच्छा लगा !
स्वस्थ रहें!
.एक अंतराल के बाद
ReplyDeleteआपको सुना पढ़ा .आवाजाही बनाए रखिये .
बहुत अच्छा लगा .दशहरा . पर्व की बधाई
भाई जी ,आपको भी बधाई !
Deleteस्वस्थ रहें!
waah sir,, main khusnasib hu ki aapko padhne ka saubhagya mila
ReplyDeleteआभार आपके स्नेह और मान-सम्मान का !
Deleteशुभकामनाएँ!
अच्छी एवं भावमय कविता । मेरे नए पोस्ट पर पधारें।
ReplyDeleteप्रेम जी , आपके लेखों से बहुत ज्ञान मलता है ...
Deleteआभार !
ज़िंदगी का फलसफा कुछ मीठा और कुछ खट्टा
ReplyDeleteदोनों का चखा है स्वाद अच्छा
बहुत अच्छा !
अन्जाने,अनदेखे शुभचिंतक !
Deleteबहुत-बहुत शुक्रिया
खुश और स्वस्थ रहें!
एक साधारण इंसान जो अपने गुज़रे
ReplyDeleteलम्हों को अपनी यादों से सज़ाता है|
बाऊ जी,
नमस्ते!
बातें भूल जाती है और यादें ही याद आती है
और यूँ ही ज़िन्दगी कट जाती है !!!
पोस्ट
चार दिन ज़िन्दगी के .......
बस यूँ ही चलते जाना है !!
इसमें न किसी की जफ़ा है ,न वफा है
ReplyDeleteये तो बस सिर्फ जिंदगी का फ़लसफ़ा है.....
अच्छी एवं भावपूर्ण कविता.
ये दिल अब दिल कहाँ अपना ,
ReplyDeleteकहाँ पे दर्द होता है ?
हमें अब होश का अपना ,
तसव्वुर अब तो तेरा है .
शुक्रिया ,शुक्रिया ,शुक्रिया .
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