Saturday, August 03, 2013

उफ़!!! न कर....

मेरी जिन्दगी थी बेआसरा 
तेरे आसरे से पहले .....
--अशोक'अकेला'


उफ़! न कर 
तू अब लब सी ले ...
मिले ग़र ज़हर का प्याला 
आँख मूंद उसे पी ले ...

जिन्दगी में आयेगे 
वो मंज़र भी 
जिसे तू देखना न चाहे 
याद कर बीते 
सुहाने पलों को 
उन पलों में जी ले ...

कट जायेगा दिन 
ढल जाएगी रात 
आयें आँख में आंसू 
कोर होने दे गीले...

कर बिछोना धरती पर 
ओढ़ बादल आसमानी नीले ...
बरसेंगी सुहानी बारिश की बुँदे 
फूल खिलेंगे सरसों के पीले ...

बस उफ़ न कर ,तू अब लब सी ले ........
अशोक'अकेला'


23 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा आज शनिवार (03-08-2013) के गगन चूमती मीनारें होंगी में मयंक का कोना पर भी है!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. परिस्थितियां जीवन में हर रंग दिखाती है.....

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  3. आये जो आँख में आंसू, कोर गीला होने दिया...
    मान ली इन शब्दों की गरिमा, उफ़! नहीं किया...

    सुप्रभात एवं सादर प्रणाम!

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  4. बहुत ही सुंदर रंग बिखेरे हैं आपने.

    रामराम.

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  5. आपकी कविताओं का सुकून यादों में हैं उन्हें हम आगे की यात्रा में ओढ़ते बिछाते हैं और नव जीवन की शक्ति प्राप्त करते हैं।

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  6. आपकी यह रचना आज शनिवार (03-08-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

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  7. जीवन को रंगों में बाँध दिया है आपने ..बहुत खूब

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  8. बहुत बढ़िया !बहुत ही सुंदर ....बहुत खूब
    आभार..

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  9. अति सुन्दर-
    आभार-

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  10. उफ़! न कर
    तू अब लब सी ले ...दुखद परिस्थितियो का हिम्मत से सामना करना ही जिन्दगी है..सुन्दर रचना

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  11. दिल को छूती बहुत मर्मस्पर्शी प्रस्तुति...

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  12. भावो का सुन्दर समायोजन......

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  13. कट जायेगा दिन
    ढल जाएगी रात
    आयें आँख में आंसू
    कोर होने दे गीले...
    मर्मस्पर्शी,बहुत सुंदर !

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  14. न...नहीं करते उफ़ अब.....हँस कर जीना सिखा दिया ज़िन्दगी के ग़मों ने...

    सादर
    अनु

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  15. हंस - हंस के बात बयाँ कर देने का खुबसूरत अंदाज़ सुन्दर रचना |

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  16. जीवन को सहना होता है,
    मध्यम सुर कहना होता है।

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  17. लैब सीने पड़ते हैं ... साँसें लेनी पड़ती हैं ... जो उम्र है उसको बिताना ही होता है ... शायद यही लिखा है उसने जीवन में ...

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  18. या ख़ुदा!
    यादों को जब जीना सिखाया....
    होठों को सीना क्यूँ ना सिखाया... :(

    हौसला बनाए रखिए!
    मुस्कुराइये... मुस्कुराइये... मुस्कुराइये... :-)

    ~सादर!!!

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  19. ज़िंदगी अगर एक प्यार क्या गीत है
    तो ग़म का सागर भी है हँस के उस पार जाना पड़ेगा।

    ~सादर!!!

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  20. उफ़! न कर
    तू अब लब सी ले ...
    मिले ग़र ज़हर का प्याला
    आँख मूंद उसे पी ले ...

    जिन्दगी में आयेगे
    वो मंज़र भी
    जिसे तू देखना न चाहे
    याद कर बीते
    सुहाने पलों को
    उन पलों में जी ले ...

    यही तो रास्ता है ... सहमत हूं...

    आदरणीय चाचाश्री अशोक सलूजा जी
    नन्ही-सी कविता में आपने तो पूरा जीवन दर्शन भर दिया !

    # विदेश-भ्रमण से घर-वापसी हो गई , जान कर अच्छा लगा ।
    अवश्य ही आपका घर आपको देख कर ख़ुश होगा...
    हम सब भी !!

    हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !
    -राजेन्द्र स्वर्णकार

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मैं आपके दिए स्नेह का शुक्रगुज़ार हूँ !
आप सब खुश और स्वस्थ रहें ........

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