Saturday, October 26, 2013

ब्लॉग बनाम फेसबुक !!!

सोच अपनी, समझ अपनी, नज़रिया अपना 
जिसको जो अच्छा लगता है वो, 
वो ही करता रहे, सब अच्छा है 
कोई बुरा न माने ..ये मेरा नज़रिया  है ....

ये है ब्लॉग की दुनियां !!!
हकीक़त से रूबरू कराए
रोतों को हँसना सिखाये
सुख-दुःख मिल के बटाए
मिल-जुल त्यौहार मनाये 
गज़ल.गीत नज्में सुनाये
ज्ञान की बाते सिखाये
हर तरह की बात बताये
टिप्पणी हौंसला बड़ाये  
हसीन सपने सजाये    
दिलों से दिल मिलाये 
आभासी  रिश्ते बनाएं  
ये है ब्लॉग की दुनियां .....
ये है फेसबुक की दुनियां !!! 
ये वक्ती मेले लगाये
खाया-पिया स्टेटस बताये
हर पल सब को सताए 
कमेंट्स के पास न जाये 
बेदिली लाइक लगाये 
रिस्की रिश्तें बनाये
नकली मेल कराये 
झूठे सपने दिखाए
झूठी कसमें खाये
पास न कुछ रह जाये 
वो है फेसबुक की दुनियां....
अशोक'अकेला 



26 comments:

  1. बाखूबी फर्क बताया है दोनों की दुनिया के बीच ... पता नहीं कौन मेरा मन भी ब्लोगिंग की ओर ही ज्यादा रहता है ... ये ज्यादा गहरा नज़र आता है ...

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  2. बहुत अच्छा वर्णन...
    ब्लॉगिंग ही जादा सच्चा लगता है...
    :-)

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  3. सुंदर !
    आभासी दुनिया में सब हरा हरा होता है :)

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  4. ब्लॉग और फेसबुक के फर्क का सटीक विश्लेषण ।

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  5. बहुत बढ़िया...सटीक चित्रण.
    सादर
    अनु

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  6. बहुत बढिया... सटीक विश्लेषण ।

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  7. फ़ेसबुक एक ऐसा दर्पण है जिसमे झाँकते हम हैं लेकिन चेहरे औरों के नज़र आते है ! :)

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  8. सटीक चित्रण.. पूरी तरह सहमत

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  9. कमाल कर दिया आपने , मगर सही कहा !

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  10. आपकी इस प्रस्तुति को आज की बुलेटिन गणेश शंकर विद्यार्थी और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। सादर .... आभार।।

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    1. आपके स्नेह का आभार ......

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  11. नमस्कार आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (27-10-2013) के चर्चामंच - 1411 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

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    Replies
    1. अरुण जी ..आपके मान-सम्मान के लिए बहुत-बहुत आभार .....

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  12. अशोक जी ,बहुत सटीक विश्लेषण किया आपने ,बहुत बढ़िया |
    नई पोस्ट सपना और मैं (नायिका )

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  13. ब्लॉग जगत है ब्रह्म मुखचिठ्ठा (fb)उसकी माया ,

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  14. ब्लॉग जगत है ब्रह्म मुखचिठ्ठा (fb)उसकी माया ,

    मुख -चिठ्ठा तत्काली,चिठ्ठा (ब्लॉग )सेकुलर (दीर्घ काली )है।

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  15. दीपावली के पावन पर्व की बधाई ओर शुभकामनायें ...

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  16. बेहद सटीक रचना.

    दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  17. बहुत अच्छी कविता, मेरे जज्बात बिल्कुल आपके साथ हैं।

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  18. बहुत बढिया

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  19. बात लगभग सही है सर.. पर ब्लॉग और फेसबुक जैसी साइट्स में अंतर है... blogging साइट्स और सोशल नेटवर्किंग साइट्स बनाई ही अलग अलग महत्व के लिए है.. ब्लॉग साईट पे जहां हम अपने विचार, अपने तर्क साँझा करते है वहीँ सोशल नेटवर्किंग साइट्स के जरिये हम अपनों से जुड़े रहते है.... बहुत से लोग होते है जो फेसबुक जैसी साइट्स पे अनजान लोगों को जोड़ते है और फिर उनकी भावनाओं को ठेस पहुचाते है.. लेकिन कहा जाता है ना कि हर चीज का अपना फायदा और नुक्सान होता है...

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मैं आपके दिए स्नेह का शुक्रगुज़ार हूँ !
आप सब खुश और स्वस्थ रहें ........

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