Monday, March 26, 2018

जीवन नाम है ...पतझड़ का...

दास्ताँ.... पेड़ से बिछुड़े सूखे पत्ते की
तन से उतरे आत्मा रूपी ...कपड़े लत्ते की ...
-अकेला
जीवन नाम है ...पतझड़ का...
फिर पतझड़ में, पत्ता टूटा
शाख़ से उसका, नाता छुटा,
जब तक था, डाली पे लटका 
न जान को था, कोई भी खटका..

अब कौन करें उसकी रखवाली
रूठ गया जब बगिया का माली..

क्यों सूख के नीचे गिरा मैं 
मैं किसी का क्या लेता था,
धूप में छांव ,गर्मी में हवा
मैं हर राहगीर को देता था..

अब किस पर छांव बनाऊंगा
अब पैरों में, रोंदा मैं जाऊंगा..
 
अब झाड़ू से बुहारा जाऊंगा
फिर मिटटी में मिल जाऊंगा, 
अब पानी में गल जाऊंगा
आग लगी, मैं जल जाऊंगा..

जिस मिट्टी में जन्मा था,
उसी में फिर दब जाऊंगा..

जब बरसे गा, मुझ पे पानी
लौट के मैं, फिर आ जाऊंगा,
यही है जीवन-मरण का नाता
रचे जो इसको, उसको कहते,
कर्ता-धर्ता सब भाग्य-विधाता....

अशोक"अकेला"
 

17 comments:

  1. जीवन मरण का चक्र यही है जो किसी के हाथ कहाँ होता है ...
    यही है जो प्राकृति के हाथ है उस ईश्वर के हाथ है ...
    यथार्थ रचना ...

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    Replies
    1. दिगम्बर जी आप से स्नेह और सम्मान हमेशा ही पाया है...
      स्वस्थ रहें....आभार जी

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  2. Replies
    1. जोशी जी....
      आप की टिप्पणी सम्मान है मेरा ...आभार आपका जी .

      Delete
  3. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (28-03-2018) को ) "घटता है पल पल जीवन" (चर्चा अंक-2923) पर होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    राधा तिवारी

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    Replies
    1. बहुत आभार राधा जी ...स्वस्थ रहें .

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  4. आपकी लिखी रचना आज "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 28मार्च 2018 को साझा की गई है......... http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    Replies
    1. आप का आभार जी ..स्वस्थ रहें |

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  5. बहुत सुन्दर रचना

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    Replies
    1. बहुत शुक्रिया नीतू जी ...खुश रहें |

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  6. वाह!!बहुत खूबसूरत रचना।

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    1. शुभा जी ,आप का बहुत आभार...स्वस्थ रहें |

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  7. जब बरसे गा, मुझ पे पानी
    लौट के मैं, फिर आ जाऊंगा, ---
    आदरणीय सर -- जीवन के शाश्वत सत्य को बहुत ही मस्त शब्द दे दिए आपने | सुंदर प्रेरक रचना --- सादर शुभकामना -----

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  8. बहुत सुन्दर सार्थक एवं सारगर्भित अभिव्यक्ति....
    पतझड़ न हो तो नवसृजन कैसै होगा
    वाह!!!
    लाजवाब...

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  9. बहुत बहुत आभार सुधा जी ...
    स्वस्थ रहें |

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  10. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति :)
    बहुत दिनों बाद आना हुआ ब्लॉग पर प्रणाम स्वीकार करें

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  11. जी संजय जी, बहुत दिन बाद मिलना हुआ ,आभार आपका |
    आप ने याद रखा,मुझे पढ़ा ,और अपना स्नेह दिया |
    खुश रहें,स्वस्थ रहें |

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मैं आपके दिए स्नेह का शुक्रगुज़ार हूँ !
आप सब खुश और स्वस्थ रहें ........

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