Wednesday, January 09, 2013

बस!!! बेरुख़ी मुझको भाती नहीं .....

बस!!! बेरुख़ी मुझको भाती नहीं .....
 मायूस हूँ, उदासी अब मेरी जाती नही
 बहुत मनाया, बेरुख़ी उनकी भाती नही
 लाख चाहा, कभी वो भी मनाये मुझको
 आदत है उनकी, वो कभी मनाती नही  |

 सब समझाते हैं, आ-आ के मुझको ही
 क्या उनको कुछ, समझ आती नही
 कोशिशें नाकाम रहीं, भूलने की उनको
 यादेँ हैं उनकी,कि अब तक जाती नही  |

 माथे पे बिखरी, जुल्फों की वो घटाएं
 क्यों उसके चेहरे पे, अब छाती नही
 बड़ी हसरत से, देखता हूँ मैं उनको
 वो है कि अब, कभी मुस्कराती नही  |

 उसके गिले-शिकवे, मैं किससे करूँ
 बात है कि अब, लबों तक आती नही
 तरकश से तीर,जुबां से निकली बात 
 लौट कर कभी,वापस आती नही  |

 रात भर बरसा, मेरी आँखों से पानी
 क्यों "अकेला" प्यास उनकी जाती नही.......

अशोक 'अकेला'











54 comments:

  1. लाख चाहा, कभी वो भी मनाये मुझको
    आदत है उनकी, वो कभी मनाती नही |
    बड़ी हसरत से, देखता हूँ मैं उनको
    वो है कि अब, कभी मुस्कराती नही |

    दिल भिगो गई ये लाईने सलूजा साहब !

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    Replies
    1. दिल भिगो गई आपकी ये महोब्बत गोदियाल भाई जी !
      आभार!

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  2. बस!!! बेरुख़ी मुझको भाती नहीं .....
    मायूस हूँ, उदासी अब मेरी जाती नही
    सच्ची - मुच्ची !!
    सादर

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    1. बिल्कुल सच्ची -मुच्ची!!
      खुश रहें!

      Delete
  3. बस!!! बेरुख़ी मुझको भाती नहीं .....
    मायूस हूँ, उदासी अब मेरी जाती नही
    ... मन को छूते शब्‍द

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    Replies
    1. सदा खुश रहें ,,सदा जी ....

      Delete
  4. तरकश से तीर,जुबां से निकली बात,, लौट कर कभी नहीं आती
    सच को प्रकाशित करती है पंक्ति
    और ये अंतिम दो पंक्तियाँ
    रात भर बरसा, मेरी आँखों से पानी
    क्यों "अकेला" प्यास उनकी जाती नही
    हृदय को आन्दोलित कर गई

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    Replies
    1. बहुत-बहुत आभार! यशोदा जी ..
      शुभकामनायें!

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  5. कोमल से एहसासों से लबरेज़ खूबसूरत रचना

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    Replies
    1. @ मदन जी
      @संगीता जी

      दिल से शुक्रिया आपका !
      खुश रहें!

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  6. बिलकुल-
    नजरें ऐसे ना फेरो-
    आभार भाई साहब ||

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    Replies
    1. रविकर जी ,
      ऐसे न मुझको घेरो !!
      आभार जी !

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  7. तरकश से तीर,जुबां से निकली बात
    लौट कर कभी,वापस आती नही |
    काश की ये बात दिल में उतर जाये।

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    Replies
    1. आमिर भाई ...दिल तो नाज़ुक है !:-)

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  8. शुक्रिया आपकी सद्य टिप्पणियों का .
    ज़ज्बातों का सैलाब है इस रचना

    संक्षिप्त सुन्दर और मौजू प्रस्तुति

    ram ram bhai
    मुखपृष्ठ

    बुधवार, 9 जनवरी 2013
    शर्म इन्हें फिर भी नहीं आती

    http://veerubhai1947.blogspot.in/

    ये यादों के दरख्त अपनी छाया देते रहतें हैं ता - उम्र ,ये यादें उनकी होतीं हैं होती हैं .और दरख़्त दरख़्त मेरे अन्दर .

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    Replies
    1. वीरू भाई ..किसी ने सही कहा है ?
      हम सायादार पेड़ ज़माने के काम आये
      सूखने लगे तो जलाने के काम आये !!!!

      स्नेह देते रहे !

      Delete
  9. मायूस हूँ, उदासी अब मेरी जाती नही
    बहुत मनाया, बेरुख़ी उनकी भाती नही
    लाख चाहा, कभी वो भी मनाये मुझको
    आदत है उनकी, वो कभी मनाती नही |



    क्या कहने
    बहुत सुंदर

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    Replies
    1. आभार महेंद्र जी ! आप जैसे निर्भीक पत्रकार का !!

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  10. आदत है उनकी वो कभी मनाती नहीं, छोटी सी कविता मन के कितने तारों को झंकृत कर देती है हम क्या कभी जान पाएंगे।

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  11. माथे पे बिखरी, जुल्फों की वो घटाएं
    क्यों उसके चेहरे पे, अब छाती नही
    बड़ी हसरत से, देखता हूँ मैं उनको
    वो है कि अब, कभी मुस्कराती नही ...

    बहुत खूब ... वो हैं आदत ससे मजबूर .... पर हमारी उनको कुछ कहने की आदत भी जातई नहीं ...
    बहुत ही खूबसूरत नज़्म है ...

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  12. बहुत ही भावपूर्ण रचना। सुन्दर प्रस्तुती,धन्यबाद।

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  13. अंतर्तम तक पहूंचती है आपकी रचना, बहुत शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  14. उदासी में भी बहुत दिलचस्प रचना है।
    बढ़िया .

    ReplyDelete
  15. भावप्रवण पंक्तियाँ

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    Replies
    1. @ सौरभ जी @दिगम्बर नासवा जी @राजेन्द्र जी @ताऊ जी @डॉ.दराल जी @डॉ.मोनिका जी ,
      ये आप सब का प्यार और बड़प्पन है ...इसके लिए आप सब का मैं दिल से आभार करता हूँ !

      Delete
  16. आपकी इस पोस्ट की चर्चा 10-01-2013 के चर्चा मंच पर है
    कृपया पधारें और अपने बहुमूल्य विचारों से अवगत करवाएं

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  17. तस्मात् युध्यस्व भारत - ब्लॉग बुलेटिन आज की ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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    Replies
    1. @ दिलबाग जी ..आप का आभार !
      @ब्लाग बुलेटिन ...आभार जी ,,

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  18. waah sir...behad khubsurat nazam hai ....best wishes

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  19. शानदार....मगर इसके बिना मजा भी तो नहीं है....

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  20. दिल को छू गयी आपकी नज़्म! बहुत ही खूबसूरत!
    ~सादर!!!

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    Replies
    1. @पल्लवी जी ,@अरुण जी,@अनीता जी ..
      आप सब का दिल से आभार!

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  21. Replies
    1. धन्यवाद्! संगीता जी !

      Delete
  22. आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 12/01/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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    Replies
    1. यशोदा जी ,आभार आपका !

      Delete
  23. उफ़ बहुत ही प्यारी नज़्म दिल को छू गयी

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  24. बहुत सुन्दर लफ्जों में बयान की है अपनी व्यथा।

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  25. बस!!! बेरुख़ी मुझको भाती नहीं
    मायूस हूँ,उदासी अब मेरी जाती नही,,,

    बहुत उम्दा मन को छूते शब्‍द,,,

    recent post : जन-जन का सहयोग चाहिए...

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    Replies
    1. @वन्दना जी ,@ रेखा जी ,भाई भदोरिया जी ...
      आप की प्यार भरी आमद का शुक्रिया !

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  26. सब समझाते हैं, आ-आ के मुझको ही
    क्या उनको कुछ, समझ आती नही
    कोशिशें नाकाम रहीं, भूलने की उनको
    यादेँ हैं उनकी,कि अब तक जाती नही


    वाह बहुत खूब

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  27. शानदार || शानदार || शानदार ||
    :-)

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  28. एहसास यूँ ही महकते रहें आपके..

    ReplyDelete
  29. उसके गिले-शिकवे, मैं किससे करूँ
    बात है कि अब, लबों तक आती नही
    तरकश से तीर,जुबां से निकली बात
    लौट कर कभी,वापस आती नही |--बहुत सुन्दर!
    New post : दो शहीद



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    Replies
    1. @अंजू जी .रीना जी ,पाण्डेयजी.ओंकार जी और प्रसाद जी .....
      बहुत-बहुत शुक्रिया जी !

      Delete


  30. ✿♥❀♥❁•*¨✿❀❁•*¨✫♥
    ♥सादर वंदे मातरम् !♥
    ♥✫¨*•❁❀✿¨*•❁♥❀♥✿


    कोशिशें नाकाम रहीं, भूलने की उनको
    यादेँ हैं उनकी,कि अब तक जाती नही |

    देखिए , सच तो ये है कि आप-हम जैसे एक बार जिसे चाहने लगते हैं , फिर उसे भूलना चाहते भी नहीं
    :)
    क्यों , सही कहा न ?
    परमप्रिय चाचू अशोक सलूजा जी
    सादर प्रणाम !

    बढ़िया लिखा है ।
    लिखते रहें … और ऐसे ही श्रेष्ठ लिखते रहें …

    हार्दिक मंगलकामनाएं …
    लोहड़ी एवं मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर !

    राजेन्द्र स्वर्णकार
    ✿◥◤✿✿◥◤✿◥◤✿✿◥◤✿◥◤✿✿◥◤✿◥◤✿✿◥◤✿


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    Replies
    1. राजेन्द्र जी ..आप की मंगलकामनाओ का बहुत शुक्रिया !
      आपको भी मुबारक हो !

      Delete
  31. रात भर बरसा, मेरी आँखों से पानी
    क्यों "अकेला" प्यास उनकी जाती नही.......

    बेरुखी बहुत दर्द देती है. बहुत अच्छा दिलको छूती हैं ये पंक्तियाँ.

    शुभकामनायें लोहड़ी, पोंगल, मकर संक्रांति और माघ बिहू के पर्व पर.

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    Replies
    1. रचना जी ..आप की स्नेह से भरी शुभकामनाओ का बहुत आभर जी !
      सदा खुश और स्वस्थ रहें!

      Delete
  32. बाऊ जी, नमस्ते!
    वो सब समझते हैं, सिर्फ अदाकारी नासमझी की है!

    --
    थर्टीन रेज़ोल्युशंस!!!

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  33. कोशिशें नाकाम रहीं, भूलने की उनको
    यादेँ हैं उनकी,कि अब तक जाती नही |

    ....ये यादें कहाँ पीछा छोड़ते हैं...दिल को छूती बहुत भावमयी रचना...

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  34. बहुत शानदार ग़ज़ल शानदार भावसंयोजन हर शेर बढ़िया है आपको बहुत बधाई

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मैं आपके दिए स्नेह का शुक्रगुज़ार हूँ !
आप सब खुश और स्वस्थ रहें ........

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