Saturday, November 11, 2017

मेरे मन के भावों की तुकबंदी ....

मेरे मन के भावों की तुकबंदी ....

मुझे ख़ुदा की ख़ुदाई पसंद है
मुझे आसमां की ऊंचाई पसंद है
 मुझे धरती की चौड़ाई पसंद है
 मुझे समंदर की गहराई पसंद है...

 पहाड़ों की ऊंचाई पसंद है
घाटियों की गहराई पसंद है
 नदी की लम्बाई पसंद है
पहाड़ों के गीत पसंद हैं
झरनों के संगीत पसंद हैं...

 सूरज की उष्णता पसंद है
चाँद की शीतलता पसंद है
 क़ुदरत के नज़ारे पसंद है
 आसमां के तारे पसंद हैं ...

किसानों की बुआई पसंद है
 फसलों की लहराई पसंद है
सुंदर गीतों के बोल पसंद हैं
 गाने वाले लोग पसंद हैं
 धरती के बाशिंदे पसंद हैं
 उड़ने वाले परिंदे पसंद हैं ...

 अच्छों की अच्छाई पसंद है
 कमज़ोर की भलाई पसंद है
 चिड़ियों की चेह्चाहना पसंद हैं
बच्चों की खिलखिलाना पसंद हैं
 नाज़ुक फूलों का माली पसंद है
 अपनी औलाद की खुशहाली पसंद है...

 माँ बाप की दी जिन्दगी पसंद है
 उपर वाले की खामोश बंदगी पसंद है...

 ये सब नेमते बक्शी उस मालिक की
 उसका नाशुक्रा होना, सख्त नापसंद है
मुझे बस... अपनी ज़मीनी हकीक़त पसंद है... 
 -अकेला

17 comments:

  1. और हमे आपकी लेखनी पसंद है

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (13-11-2017) को
    "जन-मानस बदहाल" (चर्चा अंक 2787)
    पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. आप के स्नेह का आभार शास्त्री जी ....

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  3. ज़िंदगी में जो कुछ दिया है उस परवरदिगार ने सभी कुछ अच्छा है बस देखने वाली नज़र चाहिए जो आपके अंदर है ... कमाल का लिखा अशोक जी ... ज़िंदाबाद आपके मनसूबे और कलाम को ...

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    1. नासवा भाई जी ...??? खुश रहें जी

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  4. आपकी लिखी रचना  "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 15 नवम्बर 2017 को लिंक की गई है.................. http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. आभार इस सम्मान के लिए पम्मी जी ...

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  5. Replies
    1. जोशी जी,आप की टिप्पणी अनमोल है ...

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  6. बहुत ही सुंदर रचना

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    1. आप के सम्मान के लिए आभार नीतू जी ...स्वस्थ रहें |

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  7. ये सब नेमते बक्शी उस मालिक की
    उसका नाशुक्ररना होना,सख्त नापसंद है
    मुझे बस... अपनी जमीनी हकीकत पसंद है बहुत खूब

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    Replies
    1. बहुत आभार ऋतू जी ...खुश रहें |

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  8. Replies
    1. आभार शुभा जी आपका ...स्वस्थ रहें |

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  9. दिल को छूती बहुत ही सुंदर रचना।

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मैं आपके दिए स्नेह का शुक्रगुज़ार हूँ !
आप सब खुश और स्वस्थ रहें ........

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