Sunday, July 01, 2018

मेरी वो आरज़ू......जो हो सकी न पूरी ????

ब्लागिंग दिवस पर कुछ अपने मन की.....

मेरी वो आरज़ू......जो हो सकी न पूरी ????

काश! मैं भी माँ के आँचल की, छाया में सोता
खूब जी भर खिलखिलाता, फिर कभी खुल के रोता
पर ऐसा हो न सका ....
काश! मेरी भी कोई छोटी, बड़ी, एक बहन होती
फेर सर पे ममता का हाथ मेरे, वो खूब रोती
पर ऐसा हो न सका ....
काश! मेरा भी कोई, भाई तो होता
रख के सर जिसके कंधे पर, मैं खूब रोता
पर ऐसा हो न सका .....
काश! वो दोस्त मेरा, जो आज भी होता
लगा सीने से मुझे, मेरे जख्म धोता
पर ऐसा हो न सका .....
--अशोक'अकेला'
 

8 comments:

  1. बहुत लाजवाब रचना, शुभकामनाएं.
    #हिन्दी_ब्लॉगिंग
    रामराम

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    Replies
    1. राम राम ताऊ जी (भाई जी )स्नेह का शुक्रिया :)

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  2. ये काश भी न ..... कितना कुछ होने से रोक देता है कई बार ...
    सादर

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    Replies
    1. ठीक कहती है सदा जी ...पर ये काश न होता तो शायद कुछ भी न होता ....:) खुश रहें .

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  3. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (03-07-2018) को "ब्लागिंग दिवस पर...." (चर्चा अंक-3020) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. बहुत आभार शास्त्री जी आपका .नमस्कार जी |

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  4. बहुत खूब ...
    इस रचना के माध्यम से न जाने कितनी पुराणी यादें बल्कि ब्लोगिंग को भी याद कर लिया आपने ... बहुत गहरी और दिल को छूती रचना है ....

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    Replies
    1. दिगम्बर जी -टिप्पणी तो आप की दिल को छू लेती है ..स्वस्थ रहें |

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मैं आपके दिए स्नेह का शुक्रगुज़ार हूँ !
आप सब खुश और स्वस्थ रहें ........

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