Friday, November 16, 2012

ठोकरों का मारा....यह दिल बेचारा !!!

आज फिर से दाग़ा गया हूँ 
शब्द-रूपी जलती मशालों से ,
उभर आये दिल के फफ़ोले
जो दबे पड़े थे सालों से ...
---अकेला 
बार-बार भ्रम के जाल में, फंस जाता हूँ 
क्यों मैं  अपने दिल पे, चोट खाता हूँ

उम्र भर दुखाया दिल को, मैंने अपने
पर बाज़ मैं आज भी, नही आता हूँ

हर दर पे जा-जा खाई, ठोकर मैंने 
फिर दौड़ा उसी दर पे, चला आता हूँ 

शायद पलट गई हो अब, तक़दीर मेरी 
यही आज़माने मैं वापस, चला आता हूँ 

हर बार करते हैं वो, बेआबरू मुझको 
हर बार मैं वापस, बेआबरू होने आता हूँ 

कस्म उठाता हूँ ,अब वापस न आऊंगा 
तोड़ देता हूँ कस्म ,वापस चला आता हूँ

जान गये हैं, वो सब भी मुझे अच्छी तरह 
मैं बेसहारा ,कब तक "अकेला" रह पाता हूँ....
अशोक'अकेला'
    

26 comments:

  1. आदतें तजती नहीं हैं,
    मार्ग में सजती नहीं हैं,
    क्या करें पर हृदय-वीणा,
    बेसुरी बजती नहीं हैं।

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  2. आज फिर से दाग़ा गया हूँ
    शब्द-रूपी जलती मशालों से ,
    उभर आये दिल के फफ़ोले
    जो दबे पड़े थे सालों से ...
    मन को छूती पंक्तियां

    सादर

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  3. बहुत ही सुन्दर लिखा है...
    आज फिर से दाग़ा गया हूँ
    शब्द-रूपी जलती मशालों से ,
    उभर आये दिल के फफ़ोले
    जो दबे पड़े थे सालों से ...
    अति सुन्दर..
    :-)

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  4. बहुत सुन्दर..
    शायद पलट गई हो अब, तक़दीर मेरी
    यही आज़माने मैं वापस, चला आता हूँ

    उम्मीद का दिया बुझता नहीं....
    सादर
    अनु

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  5. हर बार करते हैं वो, बेआबरू मुझको
    हर बार मैं वापस, बेआबरू होने आता हूँ
    जान गये हैं, वो सब भी मुझे अच्छी तरह
    मैं बेसहारा ,कब तक "अकेला" रह पाता हूँ....
    निशब्द हूँ !!

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  6. आपका इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (17-11-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  7. दस्तूरे-दुनिया खूब बया किया है आपने !

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  8. दिल का हाल कहे दिल वाला --
    बहुत खूब .

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  9. आज फिर से दाग़ा गया हूँ
    शब्द-रूपी जलती मशालों से ,
    उभर आये दिल के फफ़ोले
    जो दबे पड़े थे सालों से ...

    बहुत बढ़िया प्रस्तुती |

    ब्लॉग पर की गई सभी टिप्पणियाँ एक जगह कैसे दिखाएँ ?

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  10. मानवीय एहसासों कमजोरियों से संसिक्त रचना ,हकीकी ज़िन्दगी का आँखों देखा हाल .

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  11. शायद पलट गई हो अब, तक़दीर मेरी
    यही आज़माने मैं वापस, चला आता हूँ,,,,वाह,,बहुत बेहतरीन अशोक जी,

    RECENT POST: दीपों का यह पर्व,,,

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  12. संवेदनशील लोगों के साथ यही होता रहा है भाई जी !
    मंगलकामनाएं आपके खूबसूरत दिल के लिए..

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  13. आप काफी समय के बार चले आये ,और नए अंदाज़ के साथ चले आये।
    बहुत ही प्यारी नज्म लिखी है। हमारी किस्मत ,वर्ना दबी ही पड़ी रह जाती।
    कुछ दिन अस्वस्थ था। इसलिए देरी से आने के लिए माफ़ी चाहता हूँ।

    मोहब्बत नामा
    मास्टर्स टेक टिप्स
    इंडियन ब्लोगर्स वर्ल्ड

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  14. आभार आदरणीय अशोक जी सलूजा -

    जब तक वो रब न मिले, रहे काम में व्यस्त |
    माटी को रखना सही, यादें रहें दुरुस्त ||

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  15. बहुत प्रेरक और सुंदर अभिव्यक्ति..

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  16. आज फिर से दाग़ा गया हूँ
    शब्द-रूपी जलती मशालों से ,
    उभर आये दिल के फफ़ोले
    जो दबे पड़े थे सालों से ...

    .............
    ...............
    ............

    ReplyDelete
  17. एक आदत सी हो गई है तू ,

    और आदत कभी नहीं जाती .

    शुक्रिया आपकी सद्य टिप्पणियों का .

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  18. मन के भावों को बहुत खूबसूरत से लिखा है ... सादर

    मेरी पहली टिप्पणी शायद स्पैम में चली गयी है .... स्पैम देखते रहा कीजिये ... और टिप्पणियों को आज़ाद किया कीजिये ....

    स्पैम देखने के लिए ---

    डैश बोर्ड --- कमेंट्स ---- स्पैम .... जिन टिपनियों को आज़ाद करना हो उसके लिए नॉट स्पैम ..... बस हो गया ।

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    Replies
    1. अपनों के मान-सम्मान और स्नेह का कर्ज़दार रहना पसंद है मुझे !
      स्पैम देखता रहता हूँ ...अपनी पूँजी को छिपाना गवारा नही मुझे ...
      शुभकामनायें आप सब को !

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    2. हर दर पे जा-जा खाई, ठोकर मैंने
      फिर दौड़ा उसी दर पे, चला आता हूँ

      शायद पलट गई हो अब, तक़दीर मेरी
      यही आज़माने मैं वापस, चला आता हूँ


      umid pe duniya kayam hai !!!

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  19. सही में ये दिल ...ताउम्र बेचारा ही रहता है ...जिसका भी मन आता है इसे दुःख देकर चला जाता है

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  20. मन के दर्द को शब्दों में उड़ेल दिया है ...
    हर शेर तीर की तरह चुभता है ...

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मैं आपके दिए स्नेह का शुक्रगुज़ार हूँ !
आप सब खुश और स्वस्थ रहें ........

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