Tuesday, February 05, 2013

यादें !!! सुहाने लम्हों की ....


रोज़ कहता हूँ ,भूल जाऊं उन्हें
पर रोज़ यह बात ,भूल जाता हूँ ||
---अज्ञात
जब-जब बीते लम्हात मुझको याद आयेंगे
सब कुछ भूल उन की यादों में खो जायेंगे

याद आते हैं मुझे अपने वो सुहाने दिन
जो अब कभी लौट कर वापस न आयेंगे

मैं तो अब भी रूठता हूँ पहले की तरह
न पहले की तरह अब वो मुझको मनाएंगे

इसी भ्रम में,मैं तो जियूँगा तब तक
अपनी 'आई' से हम न मर जायेंगे

वो भूल भी गये तो क्या वादा अपना
हमें तो याद है अब हम ही निबाहेंगे

'अकेला' याद करेंगे अपनी यादों में तुझ को  
याद कर-कर के अपनी यादों में तुझको जगायेंगे ....
अशोक सलूजा "अकेला"
.

32 comments:

  1. *'आई' आये समय पर, कुदरत का आईन |
    सप्त-वार के वारि में, मस्त तैरती मीन |
    मस्त तैरती मीन, सीन सब याद पुराने |
    कौन सकेगा छीन, तुम्हारे गीत-सुहाने |
    लम्हे लम्हें याद, यही तो है *मनुसाई |
    दूर रहो या पास, हृदय में "यादें" आई |

    आई = मौत
    मनुसाई = पराक्रम

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    1. रविकर जी आभार आपका .....'आई' पर आपने खुल के समझाया ...बस यह
      आप का ही काम था ...
      फिर से आभार !

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    2. आई आई के लिए, कुदरत का आईन |
      दोनों की गोदी सुखद, कहते रहे जहीन |

      कहते रहे जहीन, यहाँ आई ले आई |
      लेकिन आई मित्र, वहाँ निश्चय ले जाई |

      इन्तजार दो छोड़, व्यवस्था करो ख़ुदाई |
      ज्यों आई आश्वस्त, देख त्यों हर्षित आई ||
      आई=मौत / माता

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  2. यादों को दिल में संजो कर रखना भी बहुत बड़ी बात है,बहुत ही सुंदर प्रस्तुती,सादर।

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  3. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

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    Replies
    1. आभार आप के स्नेह का .....

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  4. वो भूल भी गये तो क्या वादा अपना
    हमें तो याद है अब हम ही निभाएंगे।
    लाजबाब सलूजा साहब !

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  5. बहुत सुंदर रचना..
    ये एकदम सच है कि अतीत चाहे कितना भी कड़वा क्युं न हो पर उसकी यादें हमेशा मीठी होती है।।।

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  6. मेरी यादें , याद दिला दीं इस रचना ने ! आभार भाई जी !

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  7. मैं तो अब भी रूठता हूँ पहले की तरह
    न पहले की तरह अब वो मुझको मनाएंगे

    बहुत सुंदर, क्या कहने

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  8. बहुत ही बढ़ियाँ गजल...
    :-)

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  9. बहुत सुन्दर ग़ज़ल...
    वो भूल भी गये तो क्या वादा अपना
    हमें तो याद है अब हम ही निबाहेंगे

    लाजवाब!!!
    सादर
    अनु

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  10. याद आते हैं मुझे अपने वो सुहाने दिन
    जो अब कभी लौट कर वापस न आयेंगे
    Recent postअनुभूति : चाल ,चलन, चरित्र (दूसरा भाग )
    New post बिल पास हो गया

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  11. आ लौट के आजा मेरे मीत ,तुझे मेरे गीत बुलाते हैं ......

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  12. आ लौट के आजा मेरे मीत ,तुझे मेरे गीत बुलाते हैं ......याद न जाए बीते दिनों की ......याद किया दिल ने कहाँ हो तुम .......,तुम्हें याद होगा कभी हम मिले थे ...

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  13. बहुत सुंदर, आपके शब्द सीधे आपके दिल से कीबोर्ड में उतर जाते हैं। ऊपर वाले ने आपका दिल बनाने में विशेष मेहनत की है कहीं कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। सुंदर जज्बात, सुंदर कविता

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  14. लाजबाब अभिव्यक्ति ,,,,अशोक जी,,,,

    तुमने किया न याद कभी भूलकर हमें,
    हमनें तम्हारी याद में सब कुछ भुला दिया,,,,,( जफ़र )

    RECENT POST बदनसीबी,

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  15. बेहद उम्दा ... सादर !

    ब्लॉग बुलेटिन: ताकि आपकी गैस न निकले - ब्लॉग बुलेटिन आज की ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  16. बहुत खूब लिखा आपने साब | पढ़कर एक दम अपना सा लगने लगा कुछ पुराने लम्हे आँखों के सामने दृश्य बन उभर आए | आभार |

    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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  17. 'अकेला' याद करेंगे अपनी यादों में तुझ को
    याद कर-कर के अपनी यादों में तुझको जगायेंगे ....
    दिल को छू गई आपकी गजल ...
    ----सादर

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  18. यादों को समेटे बहुत खूबसूरत गज़ल

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  19. मैं तो अब भी रूठता हूँ पहले की तरह
    न पहले की तरह अब वो मुझको मनाएंगे ..

    समय क्रूर होता है ... बदल जाता है धीरे धीरे फिर वापस नहीं आता ...
    जीवन फिर भी जीना होता है ...

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  20. सुहानी यादों को याद करने में ही मज़ा है। शुभकामनायें अशोक जी।

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  21. बहुत ही खूबसूरत जज्बातों को समेटे एक बेहतरीन ग़ज़ल !

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  22. वाह ! बहुत बढ़िया !
    ~सादर!!!

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  23. wahhh.... Bahut umda...
    http://ehsaasmere.blogspot.in/2013/02/blog-post.html

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  24. मैं तो अब भी रूठता हूँ पहले की तरह
    न पहले की तरह अब वो मुझको मनाएंगे

    वाह !!!! बड़ी गी गहरी बात कह गए..

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मैं आपके दिए स्नेह का शुक्रगुज़ार हूँ !
आप सब खुश और स्वस्थ रहें ........

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