Sunday, July 01, 2012

जीने-मरने में क्या पड़ा है, पर कहने-सुनने...

और मरने में फर्क बड़ा है .....!


एक हल्की-फुल्की संजीदा सी मुलाकात ...
सत्य पर अधारित...एक सपना !
बचपन के दोस्त ...से मुलाक़ात 
जो बड़ी जल्दी ही अपनी मंजिल 
को पा गया ........
मैं और मेरा दोस्त

ये गई बीती रात की बात है 
भले ही सपने की मुलाक़ात है 
मुश्किल से आँख लगी थी मेरी 
उसमें भी मुझे याद आ गई तेरी

झट से पास आ गया तू भी मेरे
बोला "वहाँ  काटे न कटे ,बिन तेरे" 
फिर न लगाई तूने  ये कहने में देरी.....
"कैसे कट रही है यहाँ जिन्दगी तेरी"
मैं बोला "बात-बात में मुझे याद आती है तेरी "
तू  बोला "फिर क्यों लगाता है आने मे देरी "

मैं बोला "अभी मुझे बहुत काम हैं यहाँ ".....
तू  बोला "अरे, चल बहुत आराम है वहाँ.... 
छोड़, अब तेरा क्या रखा हैं यहाँ...
तेरे लिए इक आशियाना बना रखा हैं वहाँ"

वो कह रहा था "अब यहाँ काहे का ज़ीना"
सुन ! मेरे माथे पे आ रहा था  पसीना... 
"दोनों मिल के बैठेगें ,कुछ बात करेंगें 
अपनी जवानी और बचपन को याद करेंगें"

अब मैं सोच रहा था .......!
कैसे मानूं इस की सलाह को... 
कैसे टालूं मैं आई इस बला को...

तभी ...बड़ी ज़ोर से किसी ने दरवाज़े पे घंटी बजाई 
मैं चौंक के उठा !!! बाबु जी "दूध वाला" आवाज़ आई || 
वाह! रे मेरे मालिक अच्छी की तुने... जुदाई 
शुक्रिया ! जो तुने मेरी जान छुड़ाई...हा हा हा ... 

फ़िलहाल ! खुशी-भरा अंत !
न जाने किस के लिए ...???हा हा :-))












24 comments:

  1. आँख खुली तो सपना था ,

    फिर भी कोई अपना था ,

    जान अब्ची और लाखों पाए ,

    लौट के बुद्धू घर को आए ,

    सपने से अपने घबराए ...

    बढ़िया प्रस्तुति अशोक भाई की .

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  2. यात्रा का मंचन सदा, किया करे बंगाल ।

    मौत-जिंदगी हास्य-व्यंग, क्रमश: साँझ- विकाल ।



    क्रमश: साँझ- विकाल, मस्त होकर सब झूमें।

    देते व्यथा निकाल, दोस्त सब हर्षित घूमें ।



    पर्दा गिरता अंत, बिछ्ड़ते पात्र-पात्रा ।

    पर चलती निर्बाध, मनोरंजक शुभ यात्रा ।।

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  3. रोचक, सच और सपने में अन्तर है..

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  4. गंभीर बात भी बहुत सहजता से कह दी .... जीवन के प्रति मोह नहीं छूटता

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  5. Very touching creation with a bitter truth contained in it...

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  6. सच है..भले ही सपना हो..पर जीवन के प्रति मोह कभी नही छुटता..

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  7. जीना मरना तो बस उसके हाथ में है जहाँपनाह . बस इस पल का आनंद लेते रहें .

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  8. दोस्त तू परदेशी, पार्ब्रह्मी,
    तेरा यकीन मैं करूँ कैसे,
    जीवन मोह एक विशाल सिन्धु ,
    इस भवसागर को तरू कैसे ?

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    1. बहुत सही कहा आपने ,,भाई जी !
      स्वस्थ रहें!

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  9. कण कण में है दीखता, मोहक उसका चित्र।
    कदम कदम सँग में रहे, सदा हमारा मित्र॥

    सुन्दर रचना सर...
    सादर।

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  10. क्या बात है!!
    आपकी यह ख़ूबसूरत प्रविष्टि कल दिनांक 02-07-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-928 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

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  11. सेवन कीजे दूध का , इसको अमृत जान
    हृष्टपुष्ट तन को रखे, बनें आप बलवान
    बनें आप बलवान , दूध देता दीर्घायु
    माखन दूध ही खाते थे , कृष्णा-बलदाऊ
    बुरे स्वप्न ना आते,खुलता मति का ताला
    सुबह नींद ना खुले ,जगा देता है ग्वाला ||

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  12. बहुत ही अपनापन लिए लिखा गया हर शब्द

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  13. भावमय करते शब्‍द ... अनुपम प्रस्‍तुति ..आभार

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  14. मोहब्बत में नहीं है फर्क जीने और मरने का ,
    उसी को देख कर जीते हैं ,जिस काफिर पे दम निकले .शुक्रिया अशोक भाई .आपसे बात करके अच्छा लगा .वह हमारा सुख का टुकडा था एक छोटा सा .

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  15. वाह अशोक जी ...
    सपना और साथ में कोई अपना ...
    दोस्ती जीवन है ... सुखमय यादें सुख की छाँव हैं ...

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  16. रात गई वो बात गई .सपने अभावों को भर जातें हैं सच से भी मिलवातें हैं ,नींद की करतें हैं हमारी हिफाज़त ,अव चेतन के भरतें हैं घाव ..
    सपने ,कब थे अपने

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  17. क्या बात है!
    कण कण में है दीखता, मोहक उसका चित्र।
    कदम कदम सँग में रहे, सदा हमारा मित्र॥

    सुन्दर रचना ....!!!!!

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  18. बच गए भाई जी , अभी नहीं जाना वहाँ ..
    हमें आपकी वर्षों तक जरूरत है !
    तुमको हमारी उम्र लग जाए !

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    1. भाई जी ,
      स्नेह का कोई मूल्य नही .....आभार तो
      बहुत छोटा है ,,,आप जैसे दोस्तों के लिए ?:-)

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  19. वाह क्या बात हैं जी ....कुछ यादे कुछ बाते सपनों में भी चली आती हैं ...(ये सच हैं )

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  20. बहुत सुन्दर प्रस्तुति..!
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    सूचनार्थ!

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मैं आपके दिए स्नेह का शुक्रगुज़ार हूँ !
आप सब खुश और स्वस्थ रहें ........

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