Friday, April 13, 2012

दिल की बात ...सिर्फ आप के लिए ...!!!

माना  कि आप जैसा समझदार नही हूँ मैं 
यह भी सच है'अनपढ़' हूँ,होनहार नहीं हूँ मैं 
करनी और कथनी से हमेशा कतराया हूँ मैं 
इस लिए हर तरफ से ठोकर खाया हूँ मैं 
अपनी छाती से हाथी गुज़ार सकता हूँ मैं 
काटने वाली चींटी से बहुत घबराया हूँ मैं ...

अहसास महसूस करने वालों से 
बहुत मान पा जाता हूँ मैं 
बिन अहसास, पढे-लिखे लोगों से
 बहुत घबराया हूँ मैं ...

इस ब्लॉग की  दुनिया को
 बहुत कुछ जान गया हूँ मैं 
इन आभासी रिश्तों में ,अपने जैसों की
 तलाश में आया हूँ मैं...

मेरा लिखा पढ़ो,आप की मर्ज़ी
 न पढ़ो  आप की मर्ज़ी 
खुद बोल कर अपने से 
खुद ही भूल जाता हूँ मैं 
इस लिए अपने भूले को याद रखने के लिए
 यहाँ पर लिखने आया हूँ मैं ...

जो चाहे, हर उसके लिए; बाहें मेरी हैं खुली 
हर एक पे प्यार अपना 
आशीर्वाद! लुटाने आया हूँ मैं  ...

करनी और कथनी से 
बहुत कतराता हूँ मैं 
इस लिए किसी को टोकने से 
बहुत शर्माता हूँ मैं ...
अशोक"अकेला"


29 comments:

  1. मेरा लिखा पढ़ो,आप की मर्ज़ी
    न पढ़ो आप की मर्ज़ी
    खुद बोल कर अपने से
    खुद ही भूल जाता हूँ मैं
    इस लिए अपने भूले को याद रखने के लिए
    यहाँ पर लिखने आया हूँ मैं ...

    अशोक जी,आपने तो अपने साथ२ मेरे दिल की भी बात कह दी,...बेहतरीन पंक्तियाँ,..लाजबाब पोस्ट,.....
    बैसाखी के पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएं.

    MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: आँसुओं की कीमत,....

    ReplyDelete
  2. मेरा लिखा पढ़ो,आप की मर्ज़ी
    न पढ़ो आप की मर्ज़ी
    खुद बोल कर अपने से
    खुद ही भूल जाता हूँ मैं
    इस लिए अपने भूले को याद रखने के लिए
    यहाँ पर लिखने आया हूँ मैं ...

    बहुत प्यारी बात कही आपने............
    सभी को अपनानी चाहिए....
    सादर.

    ReplyDelete
  3. करनी और कथनी से
    बहुत कतराता हूँ मैं
    इस लिए किसी को टोकने से
    बहुत शर्माता हूँ मैं ...

    Behad Umda...

    ReplyDelete
  4. आदरणीय अशोक जी
    नमस्कार !!
    ...कोमल भावनाएँ शब्दों से बाहर झांकती हुई दिल की सभी बातें कह दी आपने

    ReplyDelete
  5. हर एक पे प्यार अपना
    आशीर्वाद! लुटाने आया हूँ मैं ...

    आपकी उपस्थिति और आशीर्वाद बना रहे!
    बहुत प्यारी बातें कहीं आपने इस पोस्ट के माध्यम से!
    सादर!

    ReplyDelete
  6. हमेशा इनकी उपस्थिति और आशीर्वाद बना रहे .....
    आप जैसा समझदार (विंदास) इंसान ही ....
    दिल को छू लेने वाली बात लिख सकता है ....

    ReplyDelete
  7. करनी और कथनी से
    बहुत कतराता हूँ मैं
    इस लिए किसी को टोकने से
    बहुत शर्माता हूँ मैं ... तभी आपका एक विशिष्ट स्थान है सम्मानयुक्त

    ReplyDelete
  8. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!
    --
    संविधान निर्माता बाबा सहिब भीमराव अम्बेदकर के जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ-
    आपका-
    डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete
  9. आपका पढ़ना भाता है, तभी बन्दा यहाँ आता है।

    ReplyDelete
    Replies
    1. प्रवीण जी ,आप के मान-सम्मान का शुक्रिया |
      आप के ज्ञान भरे तरह-तरह के विषयों के लेखो पर मैं तो
      अपने आप को टिप्पणी देने में असमर्थ पाता हूँ ,जब समझ नही पाता तो पढ़
      कर वापस लौट आता हूँ .पर उनसे सीखने को कोशिश जरूर करता हूँ |
      कृपया अन्यथा न लें .....
      खुश रहें |
      आभार|

      Delete
  10. दिल की बात दिल को छू गई।

    ReplyDelete
  11. माना कि आप जैसा समझदार नही हूँ मैं
    यह भी सच है'अनपढ़' हूँ,होनहार नहीं हूँ मैं
    करनी और कथनी से हमेशा कतराया हूँ मैं
    इस लिए हर तरफ से ठोकर खाया हूँ मैं
    अपनी छाती से हाथी गुज़ार सकता हूँ मैं
    काटने वाली चींटी से बहुत घबराया हूँ मैं ...
    भाई साहब मांस से ज्यादा ऊंटनी का दूध गुणकारी होता है .अनेक रोगों में मुफीद माना गया है .क्यों हाइप कर रहे हो मांस भक्षण .भाई साहब आजकल चींटे ज्यादा है घर से संसद तक .अच्छी रचना .

    ReplyDelete
    Replies
    1. मेरे वीरू भाई राम-राम ...
      उपर की छे लाइन्स में मैंने माना है कि न मैं आप जैसा समझदार हूँ ,,
      अनपढ़ हूँ ,मंद-बुद्धि हाथी से सामना कर सकता हूँ ,पर अकलमंद चींटी
      से भी बहुत घबराता हूँ ....
      आप महाज्ञानी हैं ..मांस से ज्यादा ऊँटनी का ढूध भी गुणकारी होगा ..
      वो भी ठीक ...
      ".क्यों हाइप कर रहे हो मांस भक्षण" भाई जी ये लाइन आप ने कहाँ से कह दी
      या मैंने कहाँ लिख दी ..कृपया मुझे बताएं ताकि मैं अपनी गलती सुधार सकूं |
      मुझे आप पे पूरा भरोसा है ...कहीं तो भटक गया हूँगा मैं ? बस इसी लिए तो
      बुद्धिमानो से घबराता हूँ |मेरा डर दूर करो वीरू भाई ...आभार|

      Delete
  12. दादा मेरी तौबा मेरे ....की तौबा ,आपसे गुस्ताखी करूं.हुआ ये दो टिप्पणियाँ मिक्स हो गईं .चर्चा मंच पर 'किसी ने ऊंटनी का मांस 'परोसा था बड़े कसीदे काढ़े थे इसमें विटामिन सी होता है ,वसा कम होती है .जहां ये लाइन खत्म हो रही थी वहां से आपकी रचना पर की गई टिपण्णी शुरू हो रही थी .हो गया खेल तमाम .दादा हमारे बड़े टची हैं .भावुक हैं .मीठे हैं .हम उन्हें नाराज़ करने का सोच भी नहीं सकते .

    ReplyDelete
  13. सादर आपको बतला दें हम शिष्य भाव लिए ही मिलें हैं आपसे .उम्र में आपसे छोटे होने का भी सुख हमारे हिस्से में आया है .पिता जी कहा करते थे ,पढ़े से गुणी(गुना )ज्यादा अच्छा होता है .आप गुणी हैं . जाने अनजाने जो खता कर बैठे हैं हम उसके लिए औपचारिक रूप क्षमा याचना करने से आप हमें वंचित नहीं कर सकते .

    आदर और नेहा से वीरुभाई .

    १४४ ,KSCT-CURE FOR INCURABLES.

    FIFTH CROSS,BHEL LAY OUT ,

    AMBABHAVANI ROAD,

    (NEAR SAMBHRAM INSTITUTE OF TECNOLOGY,VIA M.S.PALYA)

    VIDYARANYA PURA POST.

    BANGALORE -500-097.

    ReplyDelete
    Replies
    1. वीरू भाई , मुझे गर्व है ,हमारे भाईचारे और आपस की दोस्ती पर ,,,हम दोनों अपनी गलती मानने में एक मिनट नही लगाते ...बस इससे ज्यादा कुछ नही कह सकता ...आपने मुझे खूब पहचाना !!
      आप का स्नेह सदा साथ बना रहे ...
      खुश और स्वस्थ रहें!

      Delete
  14. जो चाहे, हर उसके लिए; बाहें मेरी हैं खुली
    हर एक पे प्यार अपना
    आशीर्वाद! लुटाने आया हूँ मैं ...

    सुंदर भाव. हम सभी को आप का आशीर्वाद ही चाहिये.

    ReplyDelete
  15. बहुत ईमानदार रचना है अशोक जी ।
    आप यूँ ही आशीर्वाद लुटाते रहिये।
    शुभकामनायें ।

    ReplyDelete
  16. आपका स्नेह बना रहे और क्या चाहिए अशोक जी ...
    जीवन तो आना जाना वैसे भी है .. जितने पल हैं वो अच्छी यादों के साथ कटें ... इससे ज्यादा क्या चाहिए ... आशा है आपका स्वस्थ ठीक होगा ...

    ReplyDelete
  17. कल 17/04/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल (विभा रानी श्रीवास्तव जी की प्रस्तुति में) पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    ReplyDelete
  18. वाह क्या बात है बातों ही बातों में बहुत कुछ कह गए आप बस आपका प्यार और आशीर्वाद बना रहे और कुछ नहीं चाहिए हमें....

    ReplyDelete
  19. वीरा! बहुत प्यारे हो आप ! कविता नही यह तो आत्मकथ्य है आपका.जिस कारन भी आये लिखने या गाने शेअर करने ......हमे मिले यह हमारा सौभाग्य है.मेरा तो है.इन दिनों पारिवारिक जिम्मेदारियों और फेसबुक पर 'भूले बिसरे गीत' ग्रुप के कारन ब्लॉग की दुनिया से जरा सा दूर हो गई हूँ.पर वहाँ मैंने अनमोल हीरे सरीखे गीतों का खजाना पाया और कुछ बहुत अच्छे लोगों से भी मिली.
    लिखने और पढ़ने के काम से हट जाना सम्भव है क्या हमारा?? बताइए. नही न?
    बहुत प्यारी कविता है एकदम वीरे जैसी न छल न कपट न दुराव छिपाव कांच सरीखा पारदर्शी. दोनों की लम्बी,खूबसूरत और केलदी लाइफ हो ....आपकी और आपके की बोर्ड की (कलम शब्द तो नही लिख सकती न यहाँ हा हा हा )

    ReplyDelete
  20. सोरी केलदी नही हेल्दी पढियेगा.:P

    ReplyDelete
  21. अपनी कृपा और आशीर्वाद बनाये रखियेगा,यार चाचू.
    सबका नजरिया अपना अपना है,
    आप स्वस्थ और खुश रहें बस यही दुआ है.
    आपकी वीरुभाई से राम राम अच्छी लगी.
    गलतफहमी होना कोई बात नहीं,
    बस उसका दूर हो जाना ही बड़ी बात है.

    ReplyDelete
  22. सीधी और सच्ची ...बिना किसी लाग लपेट के कही ...दिल की बात ....दिल को अपील कर गयी ...!!!!

    ReplyDelete
  23. दिल से निकली बात .... सुंदर कथ्य ॥

    ReplyDelete
  24. आपका बहुत-बहुत आभार बड़े भाई .... !!

    ReplyDelete
  25. दादा बढ़िया पोस्ट है बड़ी सटीक ,देती है ये सबको सीख .
    दिल का हाल सुने दिल वाला ,सीढ़ी सी बात न मिर्च मसाला ...

    कृपया यहाँ भी पधारें -
    http://veerubhai1947.blogspot.in/
    मंगलवार, 17 अप्रैल 2012
    कोणार्क सम्पूर्ण चिकित्सा तंत्र

    कोणार्क सम्पूर्ण चिकित्सा तंत्र
    -- भाग एक --

    ReplyDelete

मैं आपके दिए स्नेह का शुक्रगुज़ार हूँ !
आप सब खुश और स्वस्थ रहें ........

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...