| मेरे मन के भावों की तुकबंदी .... मुझे ख़ुदा की ख़ुदाई पसंद है मुझे आसमां की ऊंचाई पसंद है मुझे धरती की चौड़ाई पसंद है मुझे समंदर की गहराई पसंद है... पहाड़ों की ऊंचाई पसंद है घाटियों की गहराई पसंद है नदी की लम्बाई पसंद है पहाड़ों के गीत पसंद हैं झरनों के संगीत पसंद हैं... सूरज की उष्णता पसंद है चाँद की शीतलता पसंद है क़ुदरत के नज़ारे पसंद है आसमां के तारे पसंद हैं ... किसानों की बुआई पसंद है फसलों की लहराई पसंद है सुंदर गीतों के बोल पसंद हैं गाने वाले लोग पसंद हैं धरती के बाशिंदे पसंद हैं उड़ने वाले परिंदे पसंद हैं ... अच्छों की अच्छाई पसंद है कमज़ोर की भलाई पसंद है चिड़ियों की चेह्चाहना पसंद हैं बच्चों की खिलखिलाना पसंद हैं नाज़ुक फूलों का माली पसंद है अपनी औलाद की खुशहाली पसंद है... माँ बाप की दी जिन्दगी पसंद है उपर वाले की खामोश बंदगी पसंद है... ये सब नेमते बक्शी उस मालिक की उसका नाशुक्रा होना, सख्त नापसंद है मुझे बस... अपनी ज़मीनी हकीक़त पसंद है... -अकेला |
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Saturday, November 11, 2017
मेरे मन के भावों की तुकबंदी ....
Thursday, August 31, 2017
जो गुज़र गया ..वो कल था ...!!!
जो बीत रहा, वो आज है....
जो गुज़र गया वो कल था
जो बीत रहा वो आज है
कल मालिक था
वो तख्तो-ताज का
आज बन गया सिर्फ
इक दबी आवाज़ है
वो कल था ,ये आज है ......
कल बहारें थी ,
सपनों का दौर था
आज वीराने हैं ,
खांसी का शोर है
वो कल था, ये आज है .....
क्या पापा..आप का
जमाना और था
आज हम हैं ..आज का
ज़माना और है
वो कल था, ये आज है .....
मेरे कानों में जब भी
सुनाई पड़ता है
मुझ को ये जुमला
दोहराया लगता है
वो कल था, ये आज है ....
आँख में थी रौशनी ,
और चेहरे पर नूर था
घुसा मोतिया आँखों में ,
हो गया चेहरा बे-नूर है
वो कल था, ये आज है .....
ये जिन्दगी का पहिया बस
यूँ ही चलता रहेगा
कल आज में और आज कल में
बस ढलता रहेगा
वो कल था, ये आज है .....
कल तक नज़ाकत थी
बहारें थी, नजारे थे
जिस तरफ़ प्यार से देखो लो ,
सब हमारे थे
क्योंकि वो कल था, ये आज है...
खुरदरे हो गये हम ,
वीरान हो गयी बहारें
धुंधला गये नजारे.....
डाल के माथे पे सिलवट,
जिधर देखें, वो बोलें
हम न थे कभी तुम्हारे....
क्योंकि वो कल था, ये आज है ....
कल जो आवाज़ थी वो
गुज़रे कल की बात थी
ये जीता-जागता आज है
आज वो बे-आवाज़ है
मुस्कराओ ,ख़ुशी मनाओ ,
गुनगुनाओ आज के गीत
वो कल था, ये आज है .....
वो हमारा समाज था
ये आज का समाज है
वो कल था, ये आज है .....
-अकेला
Wednesday, July 26, 2017
ये वक्त है....???
ये वक्त है....???
ये वक्त है, जो बहुत कुछ हम से कराता है
ये वक्त है, जो बहुत कुछ हम को दिखाता है
ये वक्त है, जो बहुत कुछ हम को समझाता है
ये वक्त है, जो नाकामयाबी पर हम को चिड़ाता है
ये वक्त है, जो अपनी मर्ज़ी से हम को चलाता है
ये वक्त है, जो हम को गद्दी पर बैठाता है
ये वक्त है, जो हम को कुर्सी से गिराता है
ये वक्त है, जो चोटी पर हम को चढ़ाता है
ये वक्त है, जो हम को गिरा के उठाता है
ये वक्त है, जो हम को लड़ाता है
ये वक्त है, जो हम को हराता है
ये वक्त है, जो रूठों को मनाता है
ये वक्त है, जो चोट पर मरहम लगाता है
ये वक्त है, जो एहसान हम पर जताता है
ये वक्त है, जो चैन की नींद हम को सुलाता है
ये वक्त है, जो कुछ भी न करने से घबराता है
ये वक्त है, जो हम को जीना सिखाता है
ये वक्त है, जो उम्र हमारी को घटाता है
ये वक्त है, जो हम को मरने से डराता है
ये वक्त है, जो चाल अपनी से हम को हराता है
ये वक्त है, जो अर्थी पर हम को लिटाता है
ये वक्त है, जो चिता हमारी को सज़ाता है
ये वक्त है, जो आखिर आग में हम को जलाता है
ये वक्त है, छोड़ पीछे सबको आगे निकल जाता है.......
ये वक्त है, जो फिर कभी हाथ नही आता है
सो डर कर रह इस वक्त से हर दम-हर घड़ी
न इससे अच्छा कोई दुनियां में,
न इस वक्त से कोई मुसीबत बड़ी.....
--अकेला
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Friday, July 21, 2017
वक्त.....वक्त की बात है!!!
वक्त.....वक्त की बात है!!!
वक्त वक्त की बात है
वक्त क्या क्या दिखलाता है
वक्त क्या क्या समझाता है
लड़े-झगड़े गले मिले
गिले-शिकवे दूर हुए ......
ये हमारे वक्त की बात है.....
लड़े- झगड़े गले मिले
लबों पे मुस्कान
दिल से दूर हुए....
ये आज के वक्त की बात है .....
दुनियां की उलझनों से कर ली मैंने दोस्ती
इस जिन्दगी के मोड़ आज-तक मेरे न हुए....
--अकेला
#हिंदी_ब्लागिँग
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Thursday, July 20, 2017
यादें...: कामयाबी की तदबीरें...???
यादें...: कामयाबी की तदबीरें...???#हिंदी_ब्लागिँग: ब्लॉग में लिखने वालों को भी फिर से पढ़ा जाने लगा है या जाने लगेगा .....बहुत मंजे हुए ब्लोगरों की मेहनत फिर से रंग लाएगी...और हम जैसो ...
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